शहाना उसका बेटा ट्वन्टी व दरोगा राजेंद्र सिंह।
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गोरखपुर महिला अस्पताल की संविदाकर्मी शहाना का जीवन खत्म हो गया, मगर अपने पीछे वह अंतहीन कहानियों को सिलसिला छोड़ गई। जितने मुंह उतनी बात, मगर एक बात किसी के समझ नहीं आ रही है कि घटनावाली रात आखिर हुआ क्या? गुरुवार शाम तक सब ठीक था। वह अपने गांव गई और लौट भी आई। आत्महत्या मान भी लें तो फिर ऐसी कौन-सी वजह होगी, जिसकी वजह से उसने मौत को गले लगा लिया। आर्थिक तंगी के चलते मौत को गले लगाने की बात तो बेमानी है, लेकिन दूसरा प्रत्यक्ष कोई कारण सामने नहीं है। शहाना के मौत की वजह कौन था ? केबीसी में यह सवाल उठे तो विकल्प बताए बिना, खेलने वाला यही जवाब देगा कि यकीनन राजेंद्र सिंह। गुरुवार रात से मौत तक उस कमरे में केवल शहाना, उसका एक साल का बच्चा और दरोगा राजेंद्र सिंह ही थे।
कहीं पुलिस के दिमाग की उपज तो नहीं कथित पति समीर
शहाना की मौत के बाद ही बच्चे के पिता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इस बीच कोतवाली पुलिस की ओर से बताया गया कि समीर नाम के एक युवक से उसने शादी की थी। समीर कहां का रहने वाला है, उसकी शादी कब हुई थी, इसके बारे में अभी तक कोई पुख्ता जानकारी पुलिस के पास नहीं है। अब पुलिस का दावा है कि दोनों के बीच विवाद हो गया था और लंबे समय से अलग रह रहे थे। वैसे माना जा रहा है कि समीर पुलिस के दिमाग की उपज है, वास्तव में ऐसा कोई शख्स नहीं है।
यह थी घटना
जानकारी के मुताबिक, बेलीपार के भीटी गांव निवासी शहाना निशा कोतवाली इलाके के बक्शीपुर में किराए पर कमरा लेकर रहती थी। वह जिला अस्पताल में संविदाकर्मी थी। 15 अक्तूबर की सुबह किराए के कमरे में फंदे से लटकता उसका शव मिला था। घुटने मुड़े हुए जमीन पर टिके थे, वह इबादत की मुद्रा में बैठी नजर आ रही थी। शहाना का करीब एक वर्ष का बेटा अपनी मां का शव पकड़कर बिलख रहा था।
तहरीर में ये हैं आरोप
कोतवाली पुलिस ने जिस तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया है, उसके मुताबिक शहाना से दरोगा के नजदीकी संबंध थे। वह अक्सर शहाना के कमरे पर जाता था। गत बृहस्पतिवार की रात किसी बात को लेकर दरोगा ने विवाद किया था। इसके बाद शुक्रवार की सुबह शहाना की फंदे से लटकने की जानकारी मिली थी। इस मामले में दरोगा की भूमिका संदिग्ध है। इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए।