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यूपी: ई-टिकट घोटाला के सरगना का करीबी उसके पिता संग गिफ्तार, बरामद हुआ 12 करोड़ से अधिक का दस्तावेज

Tue, 05 Jan 2021 06:53 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, बस्ती।
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Basti news - फोटो : अमर उजाला।
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आईआरसीटीसी के ई-टिकट का नकली साफ्टवेयर बेचकर करोड़ों की चपत लगाने वाले हामिद गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस व आरपीएफ टीम ने मंगलवार को बस्ती जिले के हर्रैया के मुरादीपुर चौराहे के पास से गिरफ्तार किया। हामिद के घर व प्रतिष्ठान पर भी पुलिस पहुंची और वहां से तमाम जमीन-जायदाद के कागजात, शेयर बांड आदि बरामद किया।

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एसपी हेमराज मीणा ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि इस गिरोह का आठ दिसंबर 2019 को खुलासा करते हुए तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ के आधार पर गिरोह के दो अन्य गुर्गे पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ के दौरान इन दोनों का नाम प्रकाश में आया था। जिसमें सरगना हामिद अशरफ का पिता जमीरुल हसन उर्फ लल्ला निवासी रमवापुर कप्तानगंज भी शामिल है। जबकि दूसरा गुर्गा भदोही जनपद के सुरियांव थानाक्षेत्र निवासी योगेंद्र विश्वकर्मा है जो साफ्टवेयर बेचकर मिली रकम लाकर हामिद के पिता लल्ला को नकद सौंप देता था।

बताया कि इस रकम से लल्ला तमाम जमीनें, मकान आदि खरीदकर उसमें निवेश कर देता था। तमाम रिश्तेदारों के नाम उसने जायदद खरीद रखी है। मुंबई और दुबई में भी फ्लैट होने की जानकारी मिली है। पुलिस को 12 करोड़ की कीमती रजिस्ट्री जमीन के दस्तावेज, बैंक खातों में 90 लाख रुपये के बांड मिले हैं। इसके अलावा 30 लाख रुपये बैक खाते में पाए गए। खाते को फ्रीज किया गया है।
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काली कमाई खपाने को खोला था कंपनी

एसपी ने बताया कि संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है। इसके अलावा बिना नंबर की कार, छह मोबाइल, डेबिट कार्ड, आधार कार्ड आदि भी बरामद किए गए हैं। एसपी ने बताया कि गैंगेस्टर के तहत सभी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। एसपी ने वर्कआउट करने वाली टीम को 25 हजार रुपये पुरस्कार देने का एलान किया है।

ई-टिकट का फर्जी साफ्टवेयर बेचकर की गई काली कमाई को सफेद बनाने के लिए योगेंद्र विश्वकर्मा ने केवाईआर ब्राडबैंड कंपनी खोल रखा है। हामिद के रेड मिर्ची और एएनएमएस साफ्टवेयर को पूरे भारत में बेचकर जुटाई रकम उन कंपनी में डालता था। साथ ही गोल्ड मीडिया नाम की कंपनी बनाकर उसके जरिए भी अवैध रकम वैध करने में जुटा था।  

इन्हें मिली कामयाबी
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कपिल मुनि सिंह, सीबीआई गोरखपुर के निरीक्षक दशरथ प्रसाद, आरपीएफ इंस्पेक्टर नरेंद्र यादव के अलावा एसओ हर्रैया सर्वेश राय, एसओ कप्तानगंज राज कुमार पांडेय, एसआई जितेंद्र सिंह और आरपीएफ के एएसआई रवींद्र सिंह शामिल रहे।

 
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