कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत मामले में जांच में जुटी सीबीआई की टीम सोमवार को फिर गोरखपुर पहुंची और मुकदमे से जुड़े साक्ष्य जुटाई। वहीं मंगलवार को भी होटल के अंदर सीबीआई टीम जांच कर रही है। टीम के साथ छह एफएसएल कर्मी भी गए हैं। कुल आठ लोगों की टीम होटल में गई है। यहां टीम फोरेंसिक साक्ष्य को जुटा रही है।
बता दें कि इससे पहले सीबीआई 11 नवंबर को गोरखपुर आई थी। एक सप्ताह तक यहां रहकर पूछताछ करने के बाद 17 नवंबर को आरोपियों की पेशी कराकर लौट गई थी।
चप्पल व खून से सना तौलिया कब्जे में लिया
सोमवार को पूछताछ के बाद सीबीआई ने घटना के दौरान मौका-ए वारदात से बरामद मुकदमे से जुड़े सामान मंगा लिए। थाने का होमगार्ड रामकृपाल व एक अन्य दीवान ने सामान सौंप दिया। सामान को रामगढ़ताल थाने के मालखाने में रखा गया था। इसमें होटल के रजिस्टर के अलावा मनीष गुप्ता के चप्पल और खून से सना तौलिया भी है।
27 सितंबर को हुई थी घटना
27 सितंबर की रात रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के होटल कृष्णा पैलेस में कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत हो गई थी। मनीष के दोस्तों ने पुलिस की पिटाई से मौत का आरोप लगाया था। मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने होटल के कमरा नंबर 512 में चेकिंग करने गए तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, विजय यादव व राहुल दुबे, सिपाही प्रशांत कुमार व हेड कांस्टेबल कमलेश यादव के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
मीनाक्षी ने गोरखपुर पुलिस पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। उनकी मांग पर पहले एसआईटी कानपुर को जांच दी गई थी। करीब एक महीने तक एसआईटी ने जांच की। वह चार्जशीट दाखिल करती इससे पहले जांच सीबीआई को सौंप दी गई। दो नवंबर को सीबीआई, लखनऊ ने इस मामले में अपने यहां एफआईआर दर्ज की।
11 नवंबर को सीबीआई की टीम जांच करने गोरखपुर पहुंची। छह दिनों तक यहां रहकर होटल कृष्णा पैलेस के कर्मचारी, रामगढ़ताल थाना पर तैनात पुलिसकर्मियों, मनीष के साथ होटल में भोजन करने वाले चंदन सैनी समेत नौ लोगों से पूछताछ की। सारे तथ्यों की पड़ताल, दस्तावेज और साक्ष्य जुटाने के बाद टीम 17 नवंबर का लखनऊ लौट गई थी।