देवरिया जिले के लार थाना क्षेत्र के एक गांव की बालिका और सिवान (बिहार) के एक बालक को रविवार को पुलिस ने विवाह मंडप से उठाया। सोमवार को काउंसिलिंग के दौरान बालिका ने बताया कि उसे मौसी की शादी है, कहकर मंडप में बैठाया गया था। जबकि बालक को चाचा के लिए दुल्हनिया देखने जाने की बात कहकर शादी कराने की तैयारी की गई थी। दोनों बच्चों को यह पता ही नहीं था कि उन्हीं का विवाह कराया जा रहा है।
बाल संरक्षण इकाई ने सोमवार को बालक-बालिका के परिजनों और बच्चों की काउंसिलिंग की। परिजनों को स्पष्ट तौर पर बता दिया गया कि लड़की की 18 साल की उम्र और लड़के की 21 वर्ष की आयु से पहले शादी नहीं कराई जा सकती। इससे कम आयु में विवाह कराना गैरकानूनी है और दो साल तक की जेल और साथ में एक लाख रुहो सकती है। बाल कल्याण समिति के अधिकारी जेपी तिवारी ने बताया कि दोनों परिवार मान गए हैं। दोनों के बालिग होने पर शादी करेंगे। इन दोनों पर बाल संरक्षण समिति की नजर रहेगी।
दोनों बच्चों से आज काउंसलर अर्चना और बाल संरक्षण अधिकारी ने बात की तो उन्होंने अपनी शादी करवाए जाने से अनभिज्ञता जाहिर की। बालिका को बताया गया था कि मौसी की दूसरी शादी होनी है। उसमें चलना है क्योंकि मौसा की कुछ समय पहले मौत हो गई थी। जबकि बालक को परिजनों ने चाचा की शादी के लिए दुल्हन देखने और पूजा पाठ कराने के लिए मंदिर आने की बात की थी।
रविवार को बाल विवाह की शिकायत पर एसपी डा.श्रीपति मिश्र ने टीम भेजकर शादी रूकवा दी थी। दोनों को बिहार के सिवान जिले के मैरवां स्थित चंदनियां माता मंदिर से बालिका व बालक को बरामद कर लिया। बाल विवाह में शामिल एक दर्जन के करीब घराती व बरातियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर थाने चली आई थी। बाद में शाम को सभी को छोड़ दिया गया था।