कैंट के दाउदपुर निवासी राघवेंद्र मिश्रा, मोहरीपुर निवासी सोनू कुमार पासवान, सहजनवां के अचियापार निवासी मुकेश कुमार, सहजनवां के जोन्हिया निवासी विकास उर्फ विक्की, तिवारीपुर के जाफरा बाजार निवासी सैय्यद जावेद अली, बड़हलगंज के बुढ़नपुरा निवासी शशांक पांडेय, महराजगंज के नौतनवां के पहाड़ी मोहल्ला निवासी दीपेंद्र थापा, नई दिल्ली में रहने वाला नौतनवां का जायसवाल मोहल्ला निवासी सागर जायसवाल, दिल्ली में रहने वाला नौतनवां के वार्ड नंबर 13 निवासी राहुल राना, तिवारीपुर थाने के पास का निवासी अमित कन्नौजिया, उरुवा बाजार के देवापार निवासी आशीष पाठक की गिरफ्तारी की गई है। राधवेंद्र मिश्रा और सोनू कुमार पासवान ही गिरोह का सरगना है।
बरामदगी
आरोपियों के पास से पुलिस ने 9 लाख 10 हजार रुपये नकद, 53 मोबाइल फोन, 34 मोबाइल सिम, 1 डोंगल, 26 एटीएम कार्ड, 53 पासबुक, 48 चेकबुक विभिन्न बैंकों व नामों के आठ चेक जिसमें एक चेक 2 करोड़ 60 लाख का मय हस्ताक्षर एक डिमांड ड्राफ दस करोड़ का, 213 फिंगर प्रिंट क्लोन, चार फिंगर स्कैनर, दो रजिस्टर जिसमें आधार कार्ड, विभिन्न बैंक का डाटा लिखा है, एक लैपटॉप, एक मानीटर, चार बोतल पालीमर लिक्विड, दो फिंगर प्रिंट उठाने वाला ग्लास, दो अल्ट्रा वाइलेट राड, 6 फाम सीट, एक सेल्फ इंक मशीन, दो अल्ट्रा वाइलेट, एक होंडा सिटी कार, एक प्लसर बाइक, पांच आधार कार्ड, तीन पैन कार्ड बरामद किया गया है।
गिरोह के सभी सदस्य आपस में बांट रखे थे काम
गिरोह के सभी सदस्य अपना काम बांट रखे थे। राघवेंद्र नेपाल व दिल्ली के व्यक्तियों को पैसे देकर उनका विभिन्न बैंकों में खाता खुलवाकर उनका एटीएम कार्ड, चेकबुक, नेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड एवं वीडियो केवाईसी कराकर सीएसपी बनाकर विभिन्न बैंक खातों से रुपये निकलवाता था। सोनू कुुमार आधार कार्ड डाटा व फिंगर प्रिंट विभिन्न माध्यमों से प्राप्त कर फिंगर प्रिंट क्लोन बनवाकर एईपीएस ट्रांजेक्शन के माध्यम से रुपये निकालता था।
मुकेश सीएसपी संचालक था और आधार कार्ड व फ्रिंगर प्रिंट डाटा निकालकर गिरोह को बेच देता था। विकास की सहजनवां तहसील के पास फोटो कॉपी की दुकान थी, फोटो कॉपी के बहाने आधार कार्ड नंबर व फ्रिंगर प्रिंट का डाटा चोरी करता था। सैय्यद जावेद फिंगर प्रिंट का क्लोन तैयार करता था, शशांक पांडेय नेपाल व दिल्ली के व्यक्तियों को पैसे देकर उनका बैंकों में खाता खुलवाकर था। दीपेंद्र थापा नेपाल व दिल्ली के व्यक्तियों को पैसे देकर नितेश सिंह, राहुल राना व सागर जायसवाल की मदद से खाता खुलवाता था।
सागर नेपाल व दिल्ली के व्यक्तियों को रुपये देकर उनका फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड बनवाता था, राहुल, पैसे लेकर नेपाली व्यक्तियों को दीपेंद्र थापा से मिलवाता था और नितेश सिंह की मदद से बैंक खाता खुलवाता था। अमित सैय्यद जावेद की मदद से क्लोन तैयार करता था। आशीष पाठक पैन ड्राइव से फिंगर प्रिंट का डाटा एडिट कर जावेद को उपलब्ध कराता था।
अंगूठे का निशान और आधार कार्ड का नंबर गिरोह के सदस्य रजिस्ट्री विभाग के ई रजिस्ट्री वेबसाइट से चोरी कर लेते थे। यहां से ही फिंगर प्रिंट मिल जाता था जिसका इस्तेमाल कर क्लोन को तैयार किया जाता था। इसके अलावा विकास उर्फ विक्की का सहजनवां तहसील गेट पर ही फोटो कॉपी की दुकान थी यहां पर रजिस्ट्री के लिए जब फोटो कॉपी कराने को कोई आता था तो वह आधार कार्ड और अंगूठे का निशान चुरा लेते थे। यही से दस्तावेज की चोरी कर वह पूरा गिरोह काम करता था।
ऐसे खुला मामला
दिल्ली में एक अफसर के साथ जालसाजी का मामला सामने आया था। इसकी जांच दिल्ली पुलिस ने शुरू की तो पता चला कि गोरखपुर के रहने वाले दो युवकों ने जालसाजी की है। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस ने ही गोरखपुर पुलिस को दी थी जिसके बाद दिल्ली में रहकर जालसाजी करने वाले राहुल राना और सागर जायसवाल को पुलिस ने पकड़ा। पुलिस ने इन्हीं दोनों से पूछताछ करने के बाद अन्य आरोपियों को पकड़ लिया।
2018 में पकड़े गए गिरोह से है संबंध
जालसाजी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश पुलिस ने 2018 में किया था। यह गिरोह भी उन सदस्यों से जुड़ा हुआ है। एसएसपी ने बताया कि इनके पास से वह दस्तावेज मिले है जिससे पता चला है कि पिछले गिरोह के लोगों के जमानत कराने में इन लोगों ने मदद की है। और किस किस से तार जुड़े है इसे खंगाला जा रहा है।
ऐसे करते थे जालसाजी
- पहले ग्राहक सेवा केंद्र का फ्रेंचाइजी लिया गया
- रजिस्टी आफिस की वेबसाइट या अन्य साधनों से अंगूठे का निशान और आधार कार्ड नंबर, अन्य डिटेल हासिल किया
- लोगों को फंसाकर उनका फर्जी एकाउंट खुलवाया फिर बैंकिंग के सारे दस्तावेज को अपने पास रख लिए
- फिंगर प्रिंट का क्लोन तैयार करके ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से खाते में रुपये के ट्रांसफर कर लिए
- खाते से दस हजार रुपये अपने फ्राड खाते में भेजा
- रुपये को किसी और की मदद से निकलवाते थे
- एक दिन में एक शख्स के खाते से सिर्फ दस हजार रुपये ही निकाले जाते थे