गैंगस्टर के लिए आधार बनाए गए दोनों मुकदमों का औचित्य नहीं
रणधीर सिंह पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करने के लिए दो मुकदमों को आधार बनाया गया था। पहला अपराध संख्या 14/2015 थाना शाहपुर। न्यायालय में प्रेषित अंतिम रिपोर्ट के अवलोकन से पता चला कि प्रश्नगत मुकदमा धारा 147,148,427,506 में दर्ज न होकर धारा 135 भारतीय विद्युत अधिनियम के अपराध से संबंधित है, जिसमें अभियुक्त के रूप में अंजनी श्रीवास्तव का नाम अंकित है, उक्त मुकदमे से रणधीर सिंह का कोई वास्ता नहीं है। मामले के बाद विवेचना पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रेषित की और उक्त मामले के आधार पर गैंगचार्ट गलत रूप से किया गया।
दूसरा मामला अपराध संख्या 501/2017 में धारा 420, 467, 468, 471 में 18 जनवरी 2020 में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इस मामले में रणधीर सिंह की ओर से दाखिल किए गए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति के अवलोकन से स्पष्ट है कि उक्त मुकदमे के आरोपपत्र एवं पूरी प्रक्रिया को प्रार्थीगण ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। उक्त मुकदमे की पूरी प्रक्रिया को क्रिमिनल अपील संख्या 932/2021 में पारित आदेश द्वारा निरस्त कर दिया गया। इस प्रकार रणधीर सिंह के खिलाफ गैंगचार्ट में वर्णित दो मुकदमे का अस्तित्व वर्तमान में नहीं है।
डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि कोर्ट के आदेश का अवलोकन किया जा रहा है। आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। रणधीर सिंह की तरफ से प्रत्यावेदन दिया गया है।
कारोबारी रणधीर सिंह ने कहा कि कोर्ट से न्याय मिला है। प्रशासनिक कार्रवाई एकतरफा की गई थी। छवि साफ-सुथरी है। गैंगस्टर नहीं हूं। साजिशन फंसाया गया है।