पूरे देश में एंटी बॉडी किट से जांच पर आईसीएमआर ने रोक लगा रखी है। यह किट शुरुआती दौर में चीन से आई थी। गुजरात सहित राजस्थान, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जब किट से जांच की गई, तो पता चला कि रिपोर्ट गलत आ रही है। इसके बाद केंद्र सरकार ने किट को चीन वापस कर दिया था। साथ ही आईसीएमआर ने जांच पर रोक लगा दी थी। ऐसे में किट से जांच कर पैथालॉजी ने जांच में बड़ी लापरवाही की है।
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दूसरी बात यह भी है कि आखिर यह किट पैथालॉजी को कहां से मिली? बता दें कि आईसीएमआर ने शहर में केवल तीन लैब को जांच की अनुमति दी है। वह भी आरटीपीसीआर और ट्रूनेट मशीन से। बाकी दो कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं, जो गुरुग्राम और नोएडा में आरटीपीसीआर से जांच कराते हैं। इस इस मामले के सामने आने के बाद इस आरोप में दम लगता है कि विभाग के शह पर ही इस तरह की जांच की जा रही है।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि शहर के निजी लैबों को केवल आरटीपीसीआर और ट्रूनेट से जांच की अनुमति दी गई है। एंटी बॉडी किट से जांच पर पूरे देश में रोक है। अगर किसी लैब ने एंटी बॉडी रैपिड किट से जांच की है, तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
शिवाय हॉस्पिटल के संचालक डीके राय ने बताया कि एक सप्ताह पहले मरीज भर्ती था, तो एहतियात के तौर पर खुद ही एंटी बॉडी किट से जांच की गई थी। रिपोर्ट निगेटिव आई थी। मरीज की स्थिति बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया था।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 75 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी के इलाज में लापरवाही करने वाले दोनों निजी अस्पतालों के खिलाफ सीएम से ट्विट पर शिकायत की है। जिलाध्यक्ष रुपेश कुमार श्रीवास्तव और मंत्री अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने अपनी शिकायत में बताया है कि दोनों निजी अस्पतालों ने इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए। एक अस्पताल ने खुद के पैथालॉजी में बिना अनुमति के कोरोना टेस्ट भी कर दिया। रुपये वसलूने के बाद साठगांठ की वजह से दूसरे निजी अस्पताल में भेज दिया। धन उगाही करके बुजुर्ग की जान ले ली। मामले में आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।