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पूरे देश में जिस किट से जांच पर लगी है रोक, यहां उसी एंटी बॉडी किट से कर दिया कोरोना टेस्ट

Sat, 18 Jul 2020 03:54 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • आईसीएमआर ने पूरे देश में लगा रखी है एंटी बॉडी किट से जांच पर रोक  
  • आरोप: शहर के तमाम पैथालॉजी इसी प्रतिबंधित किट से कर रहे जांच

 
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कोरोना वायरस की जांच - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के तारामंडल स्थित शिवाय हॉस्पिटल ने उस एंटी बॉडी किट से 75 वर्षीय बुजुर्ग की जांच कर दी जिस पर आईसीएमआर ने पूरे देश में रोक लगा रखी है। जांच में कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी, जबकि बुजुर्ग कोरोना पॉजिटिव निकला। शुक्रवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में बुजुर्ग की मौत हो गई। गौर करने की बात यह है कि शहर की तमाम निजी पैथालॉजी में बिना अनुमति के ही इसी प्रतिबंधित जांच किट से कोरोना की जांच की जा रही है।

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जानकारी के मुताबिक, हांसूपुर के रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। एक सप्ताह पहले बुजुर्ग के परिजन तारामंडल के शिवाय हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले गए। इस बीच बगैर आईडी जनरेट किए और जांच की अनुमति के बिना ही हॉस्पिटल ने मरीज की एंटी बॉडी किट से कोरोना जांच कर दी। किट से जांच के नाम पर 3500 रुपये लिए वसूले लिए, जबकि पूरे देश में इस किट से जांच पर आईसीएमआर ने रोक लगा रखी है।
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किट की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी आने के बाद ही इस पर रोक लगाई गई थी। बताया जाता है कि हॉस्पिटल की अपनी पैथालॉजी है। उसी पैथालॉजी से जांच की गई है, जबकि पैथालॉजी को जांच की अनुमति भी नहीं है। परिजनों का कहना है कि जब जांच की अनुमति नहीं थी और किट से जांच बंद है, तो जांच कैसे कर दी गई? उस पर रिपोर्ट भी निगेटिव बताई गई। ऐसे में कहीं न कहीं विभाग की मिलीभगत भी है। बताया जा रहा है कि इस तरह शहर के कई पैथालॉजी भी चोरी छिपे जांच कर रहे हैं। इसके बाद भी विभाग कार्रवाई करने के बजाए शिकायत के इंतजार में बैठा है।

देश भर मे एंटी बॉडी किट से जांच पर है रोक

पूरे देश में एंटी बॉडी किट से जांच पर आईसीएमआर ने रोक लगा रखी है। यह किट शुरुआती दौर में चीन से आई थी। गुजरात सहित राजस्थान, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जब किट से जांच की गई, तो पता चला कि रिपोर्ट गलत आ रही है। इसके बाद केंद्र सरकार ने किट को चीन वापस कर दिया था। साथ ही आईसीएमआर ने जांच पर रोक लगा दी थी। ऐसे में किट से जांच कर पैथालॉजी ने जांच में बड़ी लापरवाही की है।

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दूसरी बात यह भी है कि आखिर यह किट पैथालॉजी को कहां से मिली? बता दें कि आईसीएमआर ने शहर में केवल तीन लैब को जांच की अनुमति दी है। वह भी आरटीपीसीआर और ट्रूनेट मशीन से। बाकी दो कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं, जो गुरुग्राम और नोएडा में आरटीपीसीआर से जांच कराते हैं। इस इस मामले के सामने आने के बाद इस आरोप में दम लगता है कि विभाग के शह पर ही इस तरह की जांच की जा रही है।  
 
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि शहर के निजी लैबों को केवल आरटीपीसीआर और ट्रूनेट से जांच की अनुमति दी गई है। एंटी बॉडी किट से जांच पर पूरे देश में रोक है। अगर किसी लैब ने एंटी बॉडी रैपिड किट से जांच की है, तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

शिवाय हॉस्पिटल के संचालक डीके राय ने बताया कि एक सप्ताह पहले मरीज भर्ती था, तो एहतियात के तौर पर खुद ही एंटी बॉडी किट से जांच की गई थी। रिपोर्ट निगेटिव आई थी। मरीज की स्थिति बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया था।
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ट्विटर पर सीएम से की शिकायत

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 75 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी के इलाज में लापरवाही करने वाले दोनों निजी अस्पतालों के खिलाफ सीएम से ट्विट पर शिकायत की है। जिलाध्यक्ष रुपेश कुमार श्रीवास्तव और मंत्री अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने अपनी शिकायत में बताया है कि दोनों निजी अस्पतालों ने इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए। एक अस्पताल ने खुद के पैथालॉजी में बिना अनुमति के कोरोना टेस्ट भी कर दिया। रुपये वसलूने के बाद साठगांठ की वजह से दूसरे निजी अस्पताल में भेज दिया। धन उगाही करके बुजुर्ग की जान ले ली। मामले में आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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