रास्ते में उसे खाने को दिया तो बोला कि पेट में जलन हो रही है। दो पूड़ी खाया और फिर लेट गया। बाराबंकी में उसे तेज दर्द होने लगा। ट्रेन चल दी और बताया गया कि गोरखपुर में ही रुकेगी। डॉक्टर की दवा फिर उसे दी, लेकिन आराम नहीं मिला। थोड़ी ही देर में उसकी सांसें थम गई। गोरखपुर में प्लेटफॉर्म नौ पर जब ट्रेन आई तो डॉक्टरों ने उस मृत बताया।
रेलवे स्टेशन पर बड़े भाई को जहां छोटे भाई को खोने का गम था वहीं भूख से उसका बुरा हाल था। भाई की मौत के बारे में पूछते ही फूट फूटकर रोने लगा। बोला, साहब हमें क्या पता था कि यह उसके साथ आखिरी सफर है। भूख बहुत लगी थी तो जीआरपी के सिपाही ने मुझे और मेरे साथ दो और लोगों को कचौड़ी-सब्जी खाने को दिया। भाई का शव मेडिकल कॉलेज गया है, कल शव को लेकर ही जाएंगे।