इसकी जानकारी उसने न तो विभाग को दी और न ही उसका कहीं स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। 12 मई को थोड़ी तबीयत खराब हुई तो वह 13 मई को अपने बिलंदपुर खंता के रहने वाले चचेरे भाई के साथ बीआरडी मेडिकल कॉलेज के फ्लू कॉर्नर ओपीडी में जांच के लिए चला गया। जहां उसे दवा देकर घर भेज दिया गया।
इसके बाद 14 मई को फिर उसकी तबीयत बिगड़ी तो वह रसूलपुर के रहने वाले अपने चाचा और चचेरे भाई के साथ फिर से मेडिकल कॉलेज में जांच कराने गया। जहां उसका नमूना लेकर उसे घर भेज दिया गया। इस दौरान वह छह दिनों तक शहर में घूमता रहा।
नमूना लेने के बाद इसकी जानकारी बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने किसी को नहीं दी। तबीयत खराब होने के बाद भी उसे क्वारंटीन नहीं कराया गया, बल्कि उसे होम क्वारंटीन की सलाह दे दी गई।
डॉक्टरों की सलाह के बाद वह अपने चाचा और चचेरे भाई के साथ अपने घर रसूलपुर आ गया। गुरुवार देर रात जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन नींद से जागा और इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी।
देर रात ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके घर पहुंची और उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। साथ ही बहन और चाचा के परिवार को भी क्वारंटीन कर दिया गया।