एक्सप्रेस ट्रेनों के वातानुकूलित कोच में यात्रियों को अभी बेडरोल (चादर, कंबल, तौलिया और तकिया) नहीं मिलेगा। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए रेल प्रशासन ने इसे देने की तैयारी बंद कर दी है। ठंड बढ़ने के साथ ही रेल प्रशासन ने यात्रियों को बेडरोल देने की तैयारी शुरू कर दी थी। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर में बेडरोल के स्टाक की गड़ना भी कर ली गई है। कुछ बेडरोल की खरीदारी की तैयारी भी चल रही थी।
अब रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा था लेकिन, सप्ताह भर से कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए रेल प्रशासन ने फिलहाल बेडरोल न देने का निर्णय लिया है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते बेडरोल देने की तैयारी अभी रोक दी गई है।
करोड़ों के बेडरोल कंडम होने के कगार पर
रेलवे में करोड़ों रुपये कीमत के बेडरोल कंडम होने के कगार पर हैं। 23 मार्च 2020 से ही उनका उपयोग नहीं हो रहा है। जानकारों के अनुसार गोरखपुर स्थित मैकेनाइज्ड लाउंड्री में ही लगभग 55 हजार चादरों की उम्र पूरी हो चुकी है। करीब 15 हजार कंबल के अलावा तौलिया और तकिये भी पड़े हैं। रेलवे के मानक के मुताबिक कंबल का प्रयोग चार और चादर का अधिकतम दो साल तक किया जा सकता है।