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40 हजार सीओपीडी मरीजों को ठंड और कोरोना खतरनाक, जानिए विशेषज्ञ क्या दे रहे हैं सलाह

Mon, 07 Dec 2020 11:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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corona - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर में कोरोना महामारी के बीच सर्दियों का मौसम क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। जिले में ऐसे मरीजों की संख्या करीब 40 हजार बताई जाती है। विशेषज्ञ ऐसे मरीजों को ठंड और कोरोना से बचने की सलाह दे रहे हैं। जरा सी लापरवाही पर ऐसे मरीजों में उनकी सांस की नली में सिकुड़न हो सकती है, जिससे उनकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
 
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BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्र ने बताया कि सांस लेते समय आवाज आना, छाती में जकड़न होना या कोई काम करते समय सांस फूलने के जैसे लक्षण दिखें तो ऐसे लोगों को सीओपीडी है। इसे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज भी कहते हैं। सर्दियों में ऐसे मामले बढ़ते हैं। इसका सीधा असर मरीजों के फेफड़ों पर होता है। इस रोग में मरीजों को सांस लेने में मुश्किल होती है।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना महामारी के बीच इससे और भी ज्यादा बचने की जरूरत है। कोरोना वायरस का असर भी फेफड़ों पर पड़ रहा है। अगर एक साथ दोनों का संक्रमण हो जाएगा तो मामला गंभीर हो सकता है। जिले में सीओपीडी मरीजों की संख्या 35-40 हजार के बीच होगी। सीओपीडी को आसान भाषा में क्रॉनिक यानी लंबी बीमारी, ऑब्सट्रक्टिव यानी सांस की नली में सिकुड़न, पल्मोनरी डिजीज यानी फेफड़ों से जुड़ी बीमारी कहते हैं।

 

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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
20 हजार और लोगों पर बीमारी का खतरा
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि जिले में अब तक 20 हजार से अधिक लोग कोरोना का शिकार हो चुके हैं। ऐसे मरीजों को इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि वायरस ने पहले ही इनके फेफड़ों को कमजोर कर दिया है। 60 प्रतिशत कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के फेफड़ों में सिकुड़न (पल्मोनरी फाइब्रोसिस) हो चुकी है। ऐसे में जरा सी लापरवाही से इन्हें सीओपीडी का भी खतरा हो सकता है।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस तरह करता है असर
सीओपीडी से जूझ रहे मरीज में हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना काल में ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अधिक प्रदूषण वाली जगह में लोग न रहें। ठंड से हर हाल में बचें। सुबह के समय धूप जरूर लें।

 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixa
यह लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
डॉ. मिश्र ने बताया कि अगर सांस लेने में आवाज आना, छाती में जकड़न, शारीरिक श्रम करते समय सांस लेने में तकलीफ, गले में दिक्कत महसूस होना, लंबे समय तक खांसी आना, ये सभी लक्षण सीओपीडी के हैं। ऐसे मरीजों को घर में भी ऑक्सीजन लेनी पड़ सकती है।
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