बिहार के मरीज माफिया और शहर के डॉक्टर के बीच लगातार संपर्क का पर्दाफाश, पुलिस ने जांच तेज की
चार टीमें कॉल डिटेल के आधार पर गतिविधियों पर रख रही नजर, विशेष टीम रैकेट के सबूत जुटाने में जुटी
गोरखपुर। कैंट थाना क्षेत्र में मानसी हॉस्पिटल के संचालक डॉ. पंकज दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले की जांच में पुलिस अब मरीज माफिया की पड़ताल कर रही है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि बिहार के एक सक्रिय मरीज माफिया के मोबाइल की कॉल डिटेल में शहर के 20 से अधिक निजी नर्सिंग होम संचालकों के नंबर मिले हैं। इस पर्दाफाश के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
जांच में सामने आया है कि बिहार के मरीज माफिया बंटी और राजेश लगातार शहर के कुछ निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों से संपर्क में थे। पुलिस को मिली कॉल डिटेल के अनुसार, इन दोनों के मोबाइल फोन से शहर के कई अस्पताल संचालकों और डॉक्टरों से बार-बार बातचीत हुई है। इनमें मानसी अस्पताल के डॉक्टर का नाम भी सामने आया है, जिनसे कई बार फोन पर बातचीत दर्ज की गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस रैकेट के जरिये बिहार और आसपास के इलाकों से गंभीर मरीजों को गोरखपुर के निजी अस्पतालों में लाया जाता था। इसके बदले मरीज माफिया को मोटा कमीशन दिया जाता था। आशंका है कि एंबुलेंस चालकों, बिचौलियों और कुछ निजी अस्पताल संचालकों के बीच एक संगठित नेटवर्क बनाकर यह पूरा खेल चलाया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, मरीज माफिया पहले अपने संपर्कों के जरिये मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों में बेहतर इलाज का भरोसा दिलाते थे। इसके बाद उन्हें सीधे तय अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था। बदले में अस्पताल संचालक मरीज माफिया को प्रति मरीज निश्चित रकम या इलाज के खर्च का एक हिस्सा देते थे। यही वजह है कि कॉल डिटेल में लगातार संपर्क के प्रमाण सामने आए हैं।
जांच के लिए चार अलग-अलग टीमें की गईं गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए चार अलग-अलग टीमें गठित की हैं। ये टीमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर संदिग्ध डॉक्टरों और नर्सिंग होम संचालकों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में किन-किन मरीजों को किस माध्यम से इन अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस की एक विशेष टीम इस पूरे नेटवर्क के ठोस सबूत जुटाने में लगी हुई है।
आर्थिक लेन-देन और मरीजों की एंट्री रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, केवल कॉल डिटेल के आधार पर सीधे कार्रवाई करना संभव नहीं है, इसलिए नर्सिंग होम के संचालकों के आर्थिक लेन-देन, मरीजों की एंट्री रिकॉर्ड और एंबुलेंस नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। इसके लिए अस्पतालों के रजिस्टर, भर्ती रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की भी पड़ताल की जा सकती है।
वर्जन
मरीज माफिया के एंगल पर जांच शुरू कर दी गई। काॅल डिटेल में शहर के कई नर्सिंग होम संचालकों के नंबर मिले हैं। आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित डॉक्टरों, अस्पताल संचालकों और मरीज माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ संगठित अपराध से जुड़ी धाराओं में भी प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी