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गोरखपुर: महेसरा में बनेगा कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट, 2.65 करोड़ की लागत से होगा निर्माण

Tue, 18 Oct 2022 10:25 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर को कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट (निर्माण एवं विध्वंस कचरा) का भी वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाना है। इसी क्रम में नगर निगम ने कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट लगाने की योजना तैयार की है।
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गोरखपुर नगर निगम। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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महेसरा में करीब 2.65 करोड़ रुपये की लागत से कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट बनेगा। नगर निगम प्रशासन ने महेसरा स्थित इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग स्टेशन के बगल में इस प्लांट के लिए जमीन का आवंटन कर दिया है। लॉजिकुफ टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने इस प्लांट को बनाने के लिए निविदा डाली है। शासन स्तर से कंपनी तय की जाएगी। वहीं, स्वीकृति के बाद शासन से धनराशि अवमुक्त होने के बाद करीब एक साल में इस प्लांट का निर्माण हो जाएगा।

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स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर को कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट (निर्माण एवं विध्वंस कचरा) का भी वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाना है। इसी क्रम में नगर निगम ने कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट लगाने की योजना तैयार की है। दरअसल, निर्माण एवं विध्वंस कचरा को गीले और सूखे कूड़े को किसी भी हाल में नहीं मिलाया जा सकता है।

अगर यह गीले कूड़े में मिल जाता है तो मशीन को खराब कर सकता है। वहीं, सूखे कूड़े को खराब कर देता है। ऐेसे में निर्माण एवं विध्वंस कचरा के निस्तारण के लिए अलग से प्लांट लगाया जाएगा। इस प्लांट में शहर के विभिन्न इलाकों से प्राप्त निर्माण एवं विध्वंस कचरे को लाकर क्रश (तोड़) लिया जाएगा। इससे इंटरलॉकिंग ईंटें बनाई जाएंगी। साथ ही बालू भी निकाला जाएग।
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नगर निगम चीफ इंजीनियर संजय चौहान ने कहा कि लॉजिकुफ टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट के लिए टेंडर डाला है। इस प्रस्ताव को शासन को भेज दिया जाएगा। कंपनी शहर से निकलने वाले निर्माण एवं विध्वंस कचरे से इंटरलॉकिंग ईंटें बनाएगी।

 

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सड़कों की मरम्मत में होता है इस मलबे का इस्तेमाल

री-साइकिल्ड मलबे का इस्तेमाल सड़कों की मरम्मत में भी किया जाता है। कोल्ड माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर सड़कों की सर्फेसिंग मलबे की जाती है। दिल्ली में इस तकनीक का इस्तेमाल कर कुछ सड़कों को मरम्मत के लिए चुना गया है। लैंडफिल साइटों से यह मलबा लिया जा रहा है।

पेवर ब्लॉक और ब्रिक्स बनाने के भी आता है काम
मलबे का इस्तेमाल पेवर ब्लॉक और ब्रिक्स बनाने के लिए भी किया जाता है। मलबे का बारीक चूरा करके इसमें सीमेंट मिलाई जाती है। इसे सांचे में डालकर पेवर ब्लॉक औैर ब्रिक्स बनाई जाती हैं। प्रोसेसिंग प्लांट की मदद से मलबे का बारीक चूरा किया जाता है। कई स्मार्ट सिटीज में इस तरह के प्लांट संचालित हैं।

क्या है कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट
इमारतों या सड़कों को बनाने या ध्वस्त करने के दौरान निकले मलबे को कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट कहते हैं। इसमें पुरानी इंटरलॉकिंग ईंटें, जमा सीमेंट और गिट्टी का कोई ब्लॉक, पुरानी ईंटें आदि शामिल हैं।
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