गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित अतिथि
गोरखपुर। अरुणाचल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्राइबल स्टडीज के पूर्व निदेशक प्रो. एमसी बेहरा ने कहा कि प्रकृति मानव अस्तित्व से अलग नहीं बल्कि उससे गहराई से जुड़ी हुई है।
वह शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जनजातियों की पहचान और समझने के तरीके पर पुनर्विचार का आह्वान करते हुए कहा कि जनजातीय शब्द कोई सरल या निश्चित श्रेणी नहीं है। ऐतिहासिक रूप से जनजातियों को अक्सर भाईचारे, क्षेत्र या सांस्कृतिक प्रथाओं से परिभाषित समूहों के रूप में समझा गया है।
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हेमेंद्र चंडालिया ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विश्व में शांति और प्रेम को बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श करने का समय है। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू व आभार ज्ञापन प्रो. गौर हरि बेहरा ने किया। आयोजन सचिव डॉ. आमोद राय ने संगोष्ठी की रिपोर्ट रखी। संचालन शोधार्थी आयुषी कुशवाहा ने किया। इस अवसर पर प्रो. एसके सिंह डॉ. अभिषेक शुक्ल, डॉ. स्वर्णिमा सिंह, डॉ. संजय राम, डॉ. संजय तिवारी व डॉ. पंकज सिंह आदि उपस्थित रहे।