इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी शुक्रवार को एसपी बस्ती कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। उनके प्रतिनिधि ने कोर्ट में उनका व्यक्तिगत हलफनामा दायर किया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए एसपी बस्ती को 16 अप्रैल को फिर से तलब किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी शुक्रवार को एसपी बस्ती कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। उनके प्रतिनिधि ने कोर्ट में उनका व्यक्तिगत हलफनामा दायर किया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए एसपी बस्ती को 16 अप्रैल को फिर से तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने मंजीत कुमार की जमानत अर्जी पर दिया है।
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बस्ती निवासी याची मंजीत कुमार ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की, जिसमें सरकारी वकील को बार-बार निर्देश देने के बावजूद पुलिस की ओर से आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। पूर्व में कोर्ट के कड़े रुख के बाद एसपी बस्ती ने एक हलफनामा दाखिल कर दावा किया था कि अभियोजन विभाग के संयुक्त निदेशक ने जवाब तैयार करने में देरी की।
हालांकि, जब संयुक्त निदेशक ने कोर्ट में पेश होकर अपनी स्थिति स्पष्ट की, तो पता चला कि जवाब तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित जांच अधिकारी की थी, न कि अभियोजन अधिकारी की। कोर्ट ने पाया कि क्षेत्राधिकारी (सीओ) की ओर से तैयार की गई जांच रिपोर्ट भी दोषपूर्ण है।
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इस मामले में कोर्ट ने एसपी बस्ती को 10 अप्रैल 2026 को तलब किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गलत तथ्यों के आधार पर हलफनामा दाखिल करना अदालत की अवमानना के समान है, इसलिए एसपी को स्पष्टीकरण देना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। इस आदेश के अनुपालन में एसपी के प्रतिनिधि कोर्ट में उपस्थित हुए।