गोरखपुर में गलत बिजली बिल और लोड कम कराने के संबंध में शिकायतें बिजली निगम में बढ़ीं हैं, लेकिन उनका समाधान अटका पड़ा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर रीडर समय से घर नहीं आते हैं। ऐसे में कार्यालय जाने पर उन्हें अधिक बिल की पर्ची थमा दी जाती।
शहरी क्षेत्र में एक लाख 88 हजार बिजली निगम के उपभोक्ता है। उपकेंद्रों पर आने वाले शिकायतों के आंकड़ों की मानें तो इसमें से 20 प्रतिशत उपभोक्ता के बिल समय से नहीं बन सके हैं। इन्हें अब अपने जून और जुलाई के बिल एक साथ अगस्त में आने का डर सता रहा है।
कई उपभोक्ताओं के पास तो दो महीने का बिल एक साथ आ भी गया। इसके अलावा कुछ उपभोक्ताओं के पास गलत बिजली बिल पहुंच गया है। इन उपभोक्ताओं ने अपने बिल की गड़बड़ी को ठीक कराने के लिए शिकायत भी की है।
शहरी अधीक्षण अभियंता यूसी वर्मा ने कहा कि बिजली बिल को लेकर कुछ लोगों की समस्याएं आई हैं। हालांकि, मोबाइल पर ऑनलाइन बिल भेजने की सुविधा है। मीटर से रीडिंग देखकर बिल भी बनवा सकते हैं और भुगतान भी कर सकते हैं।
केस 1
राप्तीनगर प्रवीण मिश्रा ने बताया कि आठ किलोवाट एंपियर का विद्युत कनेक्शन है। औसतन प्रति महीने 15 हजार रुपये का बिजली बिल आता है। अब अगस्त में अचानक 45 हजार रुपये का बिल आ गया। इसे ठीक कराने के लिए लगातार राप्तीनगर खंड कार्यालय में जाता हूं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। धीरे-धीरे बिल बढ़ता ही जाएगा।
केस 2
नंदा नगर शिवम पांडेय ने बताया कि दुकान पर पांच किलोवाट का कॉमर्शियल कनेक्शन है। लॉकडाउन में दुकान बंद होने से काफी नुकसान हुआ है। दुकान खुलने से पहले लोड घटवाकर चार किलोवाट करना चाहा। बिजली दफ्तर में इस संबंध में आवेदन दिया, लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा है। अधिक लोड के मुताबिक बिजली बिल आ रहा है।