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गोरखपुर: विभागों में तालमेल नहीं होने से सुस्त पड़ रही विकास कार्यों की रफ्तार, लोग झेल रहे परेशानी

Mon, 28 Jun 2021 02:42 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

समीक्षा बैठकों में आला अफसरों के सवालों पर अलग-अलग जवाब देते हैं विभागों के अफसर। पूर्व कमिश्नर ने भी मानी थी यह खामी अब वर्तमान कमिश्नर एनजी ने भी विभागों को दी नसीहत।
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गोरखपुर में निर्माणाधीन फोरलेन। (इनसेट में कमिश्नर रवि कुमार एनजी) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर शहर में विकास कार्यों की रफ्तार रह-रहकर सुस्त पड़ जाने की वजहों में से एक बड़ी वजह विभागों के बीच आपसी तालमेल भी है। ज्यादातर योजनाओं में एक से अधिक विभागों की भूमिका होती है। ऐसे में उनके बीच सामंजस्य नहीं होने से न केवल विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ जा रही है बल्कि इसका खामियाजा जनता को भी उठाना पड़ रहा है।
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पूर्व कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने भी यह खामी पकड़ी थी और अपने कार्यकाल के दौरान ज्यादातर बैठकों में विभिन्न विभागों के अफसरों को इसे दूर करने का निर्देश देते रहे। अब वर्तमान कमिश्नर रवि कुमार एनजी भी महसूस कर रहे हैं कि विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी है। उन्होंने सभी को चेतावनी दी है कि सामंजस्य बनाकर काम को गति दें या फिर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

मंडल में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान कमिश्नर ने पाया कि विभिन्न विभागों के बीच सामंजस्य की कमी के कारण योजनाओं को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। कई योजनाएं निर्धारित समय के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं। कमिश्नर ने अब जवाबदेही तय करने के साथ ही टाइमलाइन भी जारी करना शुरू कर दिया है। किसी को एक सप्ताह तो किसी को 10 दिनों का समय दिया गया था।
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कुछ विभागों को दी गई समय सीमा अगले सप्ताह पूरी होने जा रही है। कमिश्नर का कहना है कि अब वे संबंधित परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर यह देखेंगे कि संबंधित खामी दूर हो पाई या नहीं। साथ ही यह भी कि विकास कार्यों को गति मिली पाई या अभी भी काम की रफ्तार सुस्त पड़ी है।
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बता दें कि कुछ दिनों पहले सड़कों की समीक्षा के दौरान मेडिकल कॉलेज रोड पर नाला निर्माण में सामंजस्य की कमी नजर आई थी। छह स्थानों पर मुख्य सड़क के नाले व मोहल्लों में बनी नालियों की ऊंचाई में काफी अंतर था। एक सप्ताह के भीतर इस कमी को दूर करने को कहा गया था। इसी तरह जंगल कौड़िया-मोहद्दीपुर मार्ग चौड़ीकरण में मुआवजे का मामला फंसा है। कमिश्नर ने उसे भी सुलझाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिया है, ताकि प्रभावित काम शुरू हो सके। 

पैडलेगंज से नौसड़ तक सड़क चौड़ीकरण के कार्य को जल्द शुरू करने का निर्देश दिया गया था। यहां पेड़ों की गिनती कर उसे काटने को कहा गया था। पेड़ों की संख्या को लेकर तीन तरह के जवाब सामने आए थे। पीडब्ल्यूडी के अफसर करीब 50 पेड़ बताए तो ठेकेदार की तरफ से यह संख्या 150 जबकि वन विभाग की ओर से 700 से अधिक पेड़ होने की जानकारी दी गई थी।

कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने बताया कि विकास कार्यों को गति देने के लिए संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है। कई कामों की रफ्तार धीमी होने की वजह विभागों के बीच आपसी सामंजस्य पाया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे आपस में तालमेल बैठाकर काम करें ताकि समय से परियोजनाएं पूरी हो और आमजन को भी कोई दिक्कत न हो। जल्द ही स्थलीय निरीक्षण शुरू कर यह जांचा जाएगा कि मौके पर काम की गति बढ़ने के साथ कमियों को दुरुस्त किया जा रहा है या नहीं। 
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