गोरखपुर में निर्माणाधीन फोरलेन। (इनसेट में कमिश्नर रवि कुमार एनजी)
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गोरखपुर शहर में विकास कार्यों की रफ्तार रह-रहकर सुस्त पड़ जाने की वजहों में से एक बड़ी वजह विभागों के बीच आपसी तालमेल भी है। ज्यादातर योजनाओं में एक से अधिक विभागों की भूमिका होती है। ऐसे में उनके बीच सामंजस्य नहीं होने से न केवल विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ जा रही है बल्कि इसका खामियाजा जनता को भी उठाना पड़ रहा है।
पूर्व कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने भी यह खामी पकड़ी थी और अपने कार्यकाल के दौरान ज्यादातर बैठकों में विभिन्न विभागों के अफसरों को इसे दूर करने का निर्देश देते रहे। अब वर्तमान कमिश्नर रवि कुमार एनजी भी महसूस कर रहे हैं कि विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी है। उन्होंने सभी को चेतावनी दी है कि सामंजस्य बनाकर काम को गति दें या फिर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
मंडल में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान कमिश्नर ने पाया कि विभिन्न विभागों के बीच सामंजस्य की कमी के कारण योजनाओं को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। कई योजनाएं निर्धारित समय के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं। कमिश्नर ने अब जवाबदेही तय करने के साथ ही टाइमलाइन भी जारी करना शुरू कर दिया है। किसी को एक सप्ताह तो किसी को 10 दिनों का समय दिया गया था।
कुछ विभागों को दी गई समय सीमा अगले सप्ताह पूरी होने जा रही है। कमिश्नर का कहना है कि अब वे संबंधित परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर यह देखेंगे कि संबंधित खामी दूर हो पाई या नहीं। साथ ही यह भी कि विकास कार्यों को गति मिली पाई या अभी भी काम की रफ्तार सुस्त पड़ी है।