कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कोविड 19 महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों की पहचान सोशल मीडिया, प्रेस के जरिये उजागर किए जाने पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नाराजगी जताई है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर इस पर तुरंत अंकुश लगाने का आदेश दिया है। प्रशासन से ऐसे पीड़ित परिवारों की काउंसिलिंग कर इसकी रिपोर्ट आयोग को भेजने की भी अपेक्षा की गई है।
कोविड महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों की जानकारी जिला प्रशासन की ओर से बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड की जाती है। आयोग के संज्ञान में आया कि पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी सोशल मीडिया, प्रेस, इलेक्ट्रानिक मीडिया और प्रसारण के साधनों पर सार्वजनिक की जा रही है।
इस तरह पहचान उजागर करना किशोर न्याय (ज्यूवेनाइल जस्टिस) कानून के तहत दंडनीय है साथ ही अनैतिक भी। आयोग ने आशंका व्यक्त की है कि इस तरह नाम पता सार्वजनिक किए जाने से ये नाबालिग असामाजिक तत्वों, मानव तस्कर, भिक्षावृत्ति समूहों का शिकार हो सकते हैं।
जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि जिन बच्चों की सूचना सार्वजनिक की गई है उनकी रिपोर्ट जिला टास्क फोर्स, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, एसजेपी बाल कल्याण समिति, ग्राम बाल संरक्षण समिति, निगरानी समिति के द्वारा तैयार कराई जाए। इसके बाद उन परिवारों की काउंसिलिंग करा रिपोर्ट आयोग को भेजी जाय।