कोविड के बुजुर्ग मरीज संभव नहीं है कि वह होम आइसोलेशन में ठीक हो जाए। अगर किसी को कोई गंभीर दिक्कत है तो उसे अस्पताल का ही विकल्प चुनना चाहिए। यह बातें सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने शनिवार को कही।
बताया कि कोरोना की लड़ाई में शारीरिक तौर से ज्यादा मानसिक आत्मबल की जरूरत है। बताया कि मेरे बेटे और बहू पहले से कोरोना पॉजीटिव थे और अस्पताल में भर्ती थे। हम पति-पत्नी और बेटी तीनों का पॉजीटिव आ जाने के बाद मन घबराया। एक बार लगा कि अगर दिक्कत हुई तो अस्पताल कौन ले जाएगा। लेकिन हमने होम आइसोलेशन का विकल्प चुना। घर से सभी कर्मचारियों की ड्यूटी हटा दी। इस बीच बेटे-बहू स्वस्थ होकर आए तो उन्हें अलग कमरे में रख दिया गया। लेकिन आइसोलेशन का कड़ाई से पालन किया। पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का लेवल चेक कराते रहे।
बताया कि संक्रमण के दौरान मैं रोज डायरी लिखता था। योग-व्यायाम और घर के भीतर सुबह-सुबह टहलना, काढ़ा पीना और दवाईयों के सेवन को जिंदगी का हिस्सा बनाया और स्वस्थ हो गया। जबकि मैं शुगर का मरीज भी था।
सीएमओ की पत्नी आशा तिवारी ने बताया कि घर का सारा काम हम तीनों लोग बांट कर करते थे। बीमारी से लड़ने में परिवार के भीतर की यह टीम भावना भी मददगार बनी। बेटी मधुलिका तिवारी ने बताया कि कोरोना में मानसिक तौर पर खुद को मजबूत रखना चाहिए।