इस प्लांट की क्षमता 500 टन प्रतिदिन (टीपीडी) कूड़ा निस्तारण की होगी। इस साल दिसंबर तक कूड़े से चारकोल बनाना शुरू होने की उम्मीद है। 25 वर्ष के लिए हो रहे करार से नगर निगम 650 करोड़ रुपये की बचत करेगा। निवेश को जोड़ लिया जाए तो बचत 905 करोड़ रुपये हो जाएगी। एनटीपीसी वाराणसी में 600 टीपीडी क्षमता का प्लांट लगा रहा है।
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यह देश का पहला कूड़े से चारकोल बनाने का प्लांट है। अब गोरखपुर में देश के दूसरे प्लांट की नींव पड़ रही है। फरवरी में नगर आयुक्त बनने के बाद गौरव सिंह सोगरवाल ने वाराणसी की तरह गोरखपुर में भी चारकोल प्लांट लगाने का निर्णय लिया था। उन्होंने एनटीपीसी के दिल्ली कार्यालय में दो बार पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात की।
एनटीपीसी 25 वर्ष तक प्लांट का संचालन करेगी। यहां 10 एकड़ क्षेत्रफल में बायो कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) प्लांट की स्थापना की जा रही है। नगर निगम एनटीपीसी को एक रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर 25 वर्ष के लिए जमीन देगी। यहां रोजाना तकरीबन 200 टन चारकोल बनेगा। चारकोल प्लांट स्थापित होने के साथ ही न सिर्फ महानगर, वरन जिले की कई नगर पंचायतों और संत कबीरनगर से भी कूड़ा आएगा।
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नगर निगम क्षेत्र में रोजाना 506 टन कूड़ा निकल रहा है। इसमें से 200 टन गीला कूड़ा बायो सीएनजी प्लांट को दिया जाएगा। बचा 306 टन कूड़ा चारकोल प्लांट को भेजा जाएगा। सहजनवां, मगहर, घघसरा, उनवल, बांसगांव आदि नगर पंचायतों व नगर पालिकाओं से कूड़ा मंगाया जाएगा।
मेयर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सुथनी का हरित कोयला प्लांट हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसे लेकर मुख्यमंत्री के सामने पूरे प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई। पूरा प्रयास है कि इस प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद करें। नगर निगम की तरफ से उन्हें शिलान्यास कार्यक्रम के लिए अनुरोध किया गया है।