एसपी की जांच से पता चला कि वादी ने 6 मार्च 2020 को फौरी सूचना देने के बाद किन कारणों से 10 मार्च को हत्या की सूचना लिखवाई, इस बारे में विवेचक ने गहराई से छानबीन नहीं की। विवेचक ने घटना के तीन दिन बाद वादी द्वारा अभियोग पंजीकृत कराने में हुई देरी के कारणों का विवेचना में उल्लेख नहीं किया है।
चश्मदीद गवाहों के बयान तथा धारा 164 सीआरपीसी का बयान न्यायालय में दर्ज नहीं कराया गया। बयान की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। मुकदमे में घटना की सत्यता को जानने के लिए विवेचक ने संदिग्ध व्यक्तियों का सीडीआर प्राप्त किया, लेकिन उसका गहनता से विश्लेषण नहीं किया। घटनास्थल एवं मृतक के चोटों की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी को विवेचना में शामिल नहीं किया गया। पांचों तथ्यों में विवेचक व प्रभारी निरीक्षक गुलरिहा द्वारा विवेचना सरसरी तौर पर की गई। साथ ही विवेचना लंबे समय तक लंबित रखी गई।
क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच
एसएसपी ने घटना की जांच अपराध शाखा को स्थानांतरित किया है। उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक अपराध को इसे अपने पर्यवेक्षण में अपराध शाखा में तैनात निरीक्षक से गुण दोष के आधार पर निस्तारित कराने का निर्देश दिया है।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने कहा कि एसपी की जांच में विवेचना के दौरान कई तथ्यपरक कमियां सामने आने पर कार्रवाई की गई है। नए सिरे से मामले की विवेचना अब क्राइम ब्रांच करेगी। जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पहले की विवेचना में पुलिस ने लगाई अंतिम रिपोर्ट
गुलरिहा पुलिस की पहले की विवेचना में मामले को आत्महत्या बताया गया था। कहा गया था कि संजीव का किसी लड़की से प्रेम प्रसंग था। उसने 5 मार्च को प्रेमिका को फोन किया था, मगर वह फोन उठा नहीं रही थी, लिहाजा वह उसके घर पहुंच गया। पहले प्रेमिका से झगड़ा किया फिर उस पर फायर कर दिया। प्रेमिका झुक गई तो गोली नहीं लगी। बाद में संजीव ने खुद को गोली मार ली। मामले में संजीव के पिता ने हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। मीना देवी, बहन के पति व पुत्र को मुल्जिम बता रही हैं, मगर पुलिस ने साक्ष्य के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।