मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिना शिक्षा के सामाजिक क्रांति संभव ही नहीं है। शिक्षा सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार करने का माध्यम है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 89वें संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ ने सामाजिक एकता में बाधक बनने वाली रूढ़ियों का सदैव विरोध किया। शिक्षा को सर्वांगीण विकास का माध्यम बनाने के लिए ही गोरक्षपीठ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी।
साल 1932 में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की नींव रखी। तब उनके मन में यह भाव रहा होगा कि आजाद भारत के नागरिक का व्यक्तित्व कैसा होगा। आज परिषद की संस्थाएं उनके भाव का साकार रूप में प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मस्थलों का स्वरूप सिर्फ पूजा के स्थलों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसे नेतृत्व करते हुए दिखाई देना चाहिए। गोरक्षपीठ के संतों-महंतों का यही ध्येय रहा। गोरक्षपीठ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के जरिये न केवल शिक्षा वरन आरोग्यता और समाज सेवा को भी समर्पित है। आजादी के बाद देश के नागरिक का स्वरूप क्या हो, इसी को ध्यान में रखकर युगपुरुष महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में शिक्षा परिषद का नामकरण महानायक महाराणा प्रताप के नाम पर किया। आत्म बलिदान और शौर्य की चर्चा का नाम है महाराणा प्रताप। महाराणा प्रताप ने स्वदेश और स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं माना। उनके नाम पर स्थापित यह शिक्षा परिषद राष्ट्रीयता से ओतप्रोत प्राचीन गुरुकुल पद्धति का नवीनतम रूप है।
शिक्षा नीति के हिसाब से बनाएं कार्ययोजना
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। संस्थाओं से अपील है कि वह सरकारों की मंशा के अनुरूप इस नीति के मुताबिक कार्ययोजना बनाएं। नई शिक्षा नीति के जब तक परिणाम आएंगे, तब तक महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा होगा। परिषद से जुड़ी सभी संस्थाएं इसके परिणामों से खुद को जोड़ने की तैयारी में जुट जाएं।