जानकारी के मुताबिक, बृजेश चार भाइयों में सबसे बड़े थे। वह दो पुत्रियों अंजू (12), अंशु (10) व एक पुत्र दीपांशु (04) के पिता थे। नौ माह पूर्व वह पेंटर का काम करने बंगलूरू गए थे। शनिवार को ट्रेन से घर लौट रहे थे। कानपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में ट्रेन की चपेट में आ गए। रेलवे पुलिस ने मंगलवार को गांव के प्रधान को सूचना दी। ग्राम प्रधान ने गाड़ी से परिवार के लोगों को कानपुर पहुंचाया।
बृजेश की पत्नी रीना का आरोप है कि ट्रेन में यात्रा के दौरान पति ने उन्हें सोमवार सुबह फोन कर बताया था कि सीट को लेकर कुछ लोगों से उनका विवाद हो गया। वे उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इससे वह डरे हुए थे। आरोप है कि इसी विवाद में उन लोगों ने बृजेश को ट्रेन से बाहर फेंक दिया।