चातुर्मास एक जुलाई से शुरू होगा। इस वर्ष चातुर्मास चार नहीं बल्कि पांच माह का होगा। दो आश्विन होने से चातुर्मास में सीधे एक माह का इजाफा हो रहा है। चातुर्मास में सृष्टि के पालनहार कहे जाने वाले भगवान विष्णु क्षीर सागर में आराम कर रहे होते हैं।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार चातुर्मास की शुुरुआत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है। इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को होता है। इस दौरान यानी चार माह में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं। देवउठनी एकादशी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत दोबारा फिर से हो जाती है।