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29 जून से लग रहा है चातुर्मास: भगवान विष्णु करेंगे आराम, चार महीने शादी-ब्याह को विराम

Sat, 24 Jun 2023 12:59 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

पंडित डॉ. जोखन पांडेय के मुताबिक, चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान स्वेच्छा से नियमित उपयोग के पदार्थों का त्याग करने का भी विधान है।
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चातुर्मास - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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चातुर्मास 29 जून से शुरू हो रहा है। इस वर्ष चातुर्मास चार नहीं, बल्कि पांच माह का होगा। चातुर्मास में इस बार सावन दो माह का होगा। इसलिए चातुर्मास में सीधे एक माह का इजाफा हो रहा है। मान्यता के अनुसार, चातुर्मास में सृष्टि के पालनहार कहे जाने वाले भगवान विष्णु क्षीरसागर में आराम कर रहे होते हैं। ऐसे में 29 जून से लेकर 23 नवंबर तक यानी 148 दिनों तक शादी-ब्याह समेत किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

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पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि समस्त मांगलिक कार्य भगवान विष्णु के जागृत अवस्था में ही किए जाते हैं। इस समय विष्णु भगवान के शयन करने से विवाह, वर वरण, कन्या वरण, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, शिवजी को छोड़कर देव प्रतिष्ठा, महायज्ञ का शुभारंभ, राज्याभिषेक, कर्णवेध, मुंडन आदि कार्यों का निषेध किया गया है। लेकिन, कुछ कार्य इस समय भी किए जाते हैं। इनमें पुंसवन, प्रसूति स्नान, इष्टिका दहन, नामकरण, अन्नप्राशन, व्यापार आरंभ आदि किए जा सकते हैं।



 

चातुर्मास में ये काम हैं वर्जित

पंडित डॉ. जोखन पांडेय के मुताबिक, चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान स्वेच्छा से नियमित उपयोग के पदार्थों का त्याग करने का भी विधान है। चातुर्मास में पान-मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होता है।

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चातुर्मास का वैज्ञानिक महत्व भी
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन ने बताया कि चातुर्मास का धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इन दिनों बारिश होने से हवा में नमी बढ़ जाती है। इस कारण बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े ज्यादा हो जाते हैं। उनकी वजह से संक्रामक रोग सहित अन्य बीमारियां होने लगती हैं। इससे बचने के लिए इस दौरान खानपान में सावधानी रखने के साथ संतुलित जीवन शैली अपनानी चाहिए।
 
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29 को मनेगी हरिशयनी एकादशी

पंडित बृजेश पांडेय ने बताया कि 29 जून को हरिशयनी एकादशी है। इस दिन स्वाती नक्षत्र दिन में एक बजकर 10 मिनट तक, पश्चात विशाखा नक्षत्र, सिद्ध योग भी संपूर्ण दिन और अर्द्ध रात्रि के बाद एक बजकर 27 मिनट है। इस दिन सुस्थिर नामक औदायिक योग भी है। सूर्योदय कालीन एकादशी होने से विष्णु शयनी एकादशी इसी दिन मान्य रहेगा। यह महत्वपूर्ण एकादशी है, क्योंकि इसी दिन से विवाहादि समस्त महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य पर रोक लग जाएगी।




 
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