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Gorakhpur: कानपुर-लखनऊ में छापों के खौफ से सहमा हिंदी बाजार, जमीनों पर लगे पैसे पर आयकर टीम की नजर

Sat, 24 Jun 2023 12:35 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

सराफा बाजार के सूत्रों के मुताबिक अवैध सोने का खेल करने वाले व्यापारी बड़ी फर्मों के गुलाबी नोट भी खपा रहे हैं। अवैध नोट खपाने के बदले अच्छा खासा मुनाफा लेते हैं। इन गुलाबी नोट से ही अवैध कच्चा सोना खरीदते हैं और इसमें भी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
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हिंदी बाजार के डीडी मार्केट में गैस सिलिंडर में गन लगाकर सोने को तराशते कारीगर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सराफा का पैसा माफिया के जरिए जमीनों के धंधे में लगाने वालों की तलाश में कानपुर, लखनऊ समेत कई अन्य शहरों में आयकर के छापों से गोरखपुर के भी सराफा व्यापारियों की नींद भी उड़ गई है। यहां भी बड़े पैमाने पर कच्चे सोने का धंधा होता है। खरीद बिक्री का कोई रिकाॅर्ड फर्म के खाते में नहीं जुड़ता। ये धंधा पिछले लंबे समय से फल फूल रहा है। पुलिस तक खबर है कि हिंदी बाजार में तीन से चार करोड़ रुपये का अवैध सोने का धंधा होता है, मगर इतनी सफाई से सबकुछ चलता है कि किसी के साथ कुछ नहीं लगता।

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सराफा बाजार के सूत्रों के मुताबिक अवैध सोने का खेल करने वाले व्यापारी बड़ी फर्मों के गुलाबी नोट भी खपा रहे हैं। अवैध नोट खपाने के बदले अच्छा खासा मुनाफा लेते हैं। इन गुलाबी नोट से ही अवैध कच्चा सोना खरीदते हैं और इसमें भी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। जीएसटी की नजर दोहरा मुनाफा कमाने वालों पर भी है। लखनऊ, कानपुर में इस बार आयकर विभाग ने छापा भी बुलियन कारोबारियों को चिन्हित करके ही मारा है।

ये कारोबारी कच्चे सोने के सिक्कों का धंधा करते हैं। लेकिन, फर्म पर कारोबार का डिटेल होता है। आयकर सूत्रों ने बताया कि बुलियन कारोबारी एक दूसरे के सीधे संपर्क में रहते हैं। क्योंकि, ये बाइनरी ट्रेडिंग बुलियन की साइट पर करते हैं। इसमें, सिक्का खरीदने के साथ क्रिप्टो करेंसी, विदेशी मुद्रा का व्यापार ऑनलाइन एक साथ किया जाता है।
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जमकर होता है सफेद पर्ची पर खरीद बिक्री

इसी में दाम बढ़ाने और घटाने का खेल बुलियन कारोबारी साझे में करते हैं। सोना गलाने के बाद मोटी कमाई को जमीनों के धंधों में लगाया जा रहा है। कुछ माफिया भी जमीनों और सराफ के सिंडिकेट में गहरे जुड़े हैं। इन्हीं दोनों धंधों के सहारे मोटे खर्च निकालते हैं। उनकी दबंगई से सराफा और बिल्डर अपनी बादशाहत कायम करते जा रहे हैं।

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इसी तरह सराफा, बिल्डर और माफिया का सिंडिकेट फल फूल रहा है। शहर के कुछ बड़े सोने चांदी के केंद्र हैं, जिनका कानपुर के एक बड़े कारोबारी से संपर्क है। कच्चे सोने की कड़ी इनसे भी मिलती है। आयकर सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर की सराफा मंडी से जुड़े कुछ प्रमाण भी टीम को मिले हैं।

कानपुर और लखनऊ की छापामारी के बाद से हिंदी बाजार के कुछ व्यापारियों की सांसें थमी हुई हैं। अफसरों जैसे चार लोग एक साथ दिख जाएं तो उन सराफ की नजर उन्हीं पर टिक जाती हैं। तब तक चैन नहीं पड़ता, जब तक वे बाजार से चले न जाएं। इन हालात पर धंधों से दूर कुछ सराफ चुटकी लेकर चर्चाएं भी करते सुनाई पड़ते हैं।

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सराफा बाजार में अवैध सोने को सफेद पर्ची पर खरीदने और बेचने का अवैध धंधा खूब चल रहा है। ग्राहक दुकानदार के पास जाएंगे तो पर्ची पर हिंदी में लिखा पढ़ी 2 ग्राम, पांच ग्राम, दस ग्राम तक सोना दे देते हैं। इसके अलावा अधिक भार का सोना चाहिए, तो इसके लिए फर्जी फर्म वाले बिल पर पर्ची काट दी जाती है।

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