इसी में दाम बढ़ाने और घटाने का खेल बुलियन कारोबारी साझे में करते हैं। सोना गलाने के बाद मोटी कमाई को जमीनों के धंधों में लगाया जा रहा है। कुछ माफिया भी जमीनों और सराफ के सिंडिकेट में गहरे जुड़े हैं। इन्हीं दोनों धंधों के सहारे मोटे खर्च निकालते हैं। उनकी दबंगई से सराफा और बिल्डर अपनी बादशाहत कायम करते जा रहे हैं।
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इसी तरह सराफा, बिल्डर और माफिया का सिंडिकेट फल फूल रहा है। शहर के कुछ बड़े सोने चांदी के केंद्र हैं, जिनका कानपुर के एक बड़े कारोबारी से संपर्क है। कच्चे सोने की कड़ी इनसे भी मिलती है। आयकर सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर की सराफा मंडी से जुड़े कुछ प्रमाण भी टीम को मिले हैं।
कानपुर और लखनऊ की छापामारी के बाद से हिंदी बाजार के कुछ व्यापारियों की सांसें थमी हुई हैं। अफसरों जैसे चार लोग एक साथ दिख जाएं तो उन सराफ की नजर उन्हीं पर टिक जाती हैं। तब तक चैन नहीं पड़ता, जब तक वे बाजार से चले न जाएं। इन हालात पर धंधों से दूर कुछ सराफ चुटकी लेकर चर्चाएं भी करते सुनाई पड़ते हैं।
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सराफा बाजार में अवैध सोने को सफेद पर्ची पर खरीदने और बेचने का अवैध धंधा खूब चल रहा है। ग्राहक दुकानदार के पास जाएंगे तो पर्ची पर हिंदी में लिखा पढ़ी 2 ग्राम, पांच ग्राम, दस ग्राम तक सोना दे देते हैं। इसके अलावा अधिक भार का सोना चाहिए, तो इसके लिए फर्जी फर्म वाले बिल पर पर्ची काट दी जाती है।