गोरखपुर। गुरु गोरक्षनाथ घाट पर गुंबद गिरने की घटना के बाद कुछ देर तक मौके पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। हादसे में दो अधिवक्ताओं के मलबे में दबने की जानकारी मिलते ही घाट पर मौजूद लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे। कुछ लोग घायलों को मलबे से निकालने में जुट गए, जबकि अन्य लोग घटना की जानकारी परिजनों और पुलिस को देने लगे।
हादसे के बाद घाट पर मौजूद लोगों में गुंबदों को लेकर डर का माहौल बन गया। बारिश होने पर जिन स्थानों पर लोग पहले आसानी से बैठकर पानी से बचते थे, वहां अब लोग जाने से भी कतरा रहे हैं। स्थानीय दिनेश कहना है कि बारिश के दौरान सुरक्षित स्थान की तलाश में लोग अक्सर ऐसे निर्माण स्थलों के नीचे बैठ जाते हैं। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। अरविंद ने कहा कि निर्माण कार्य की भी जांच होनी चाहिए।
अधिवक्ता ने की खुदकुशी की कोशिश
जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर अधिवक्ता जब प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे। उसी दौरान एक अधिवक्ता ने खुदकुशी की कोशिश की। वह बाइक के पास आया पेट्रोल निकालकर अभी अपने ऊपर डालने ही वाला था कि पुलिस ने उसे पकड़कर रोक दिया। इसके बाद उसे समझाकर शांत कराया।
शव पहुंचते ही मचा कोहराम, बेटे के आने का इंतजार
अधिवक्ता आलोक अस्थाना का शव रविवार देर शाम घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी शालिनी अस्थाना और बेटी सिद्धि का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजन और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाते रहे। परिजन के मुताबिक, आलोक का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। उनका बेटा आदित्य एनआईटी पंजाब में बीटेक कर रहा है। उसके आने का इंतजार किया जा रहा है। बेटे के पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इलाज न करने का आरोप
शालिनी अस्थाना ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि सदर अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। सीएमओ ने कहा कि ''''यहां रोज 10 लोग मरते हैं, एक और मर जाएगा तो क्या हो जाएगा।'''' एक घंटे तक एंबुलेंस भी नहीं मिली। पत्नी ने तहरीर में कहा है कि जानबूझकर इलाज न करने से उनके पति की मौत हुई है।