डॉ. आलोक तिवारी ने बताया शरीर के अलग-अलग कैंसर के अलग-अलग लक्षण हैं। अगर शरीर में गांठ के जरिए कैंसर होगा तो उसके आसपास की कोशिकाओं में दर्द होगा। धीरे-धीरे यह अल्सर का रूप लेता जाएगा। इसी तरह सीने के कैंसर में भी गांठ बनती है। इसमें मरीज को खांसी के दौरान खून आता है। बच्चे दानी के कैंसर में युवतियों और महिलाओं का वजन घटता है। इसके अलावा बच्चे दानी में पानी भरने की शिकायत रहती है। ऐसे में अगर यह लक्षण दिखें तो तत्काल स्क्रीनिंग और डॉक्टर से दिखाने की जरूरत है।
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डॉ. आलोक ने बताया कि अगर मरीजों की स्क्रीनिंग करके कैंसर की पहचान की जाए तो 20 फीसदी मौतें रोकी जा सकती हैं, क्योंकि पहले स्टेज में कैंसर मरीजों के बचने का प्रतिशत 80 फीसदी है। इसी तरह दूसरे स्टेज में कैंसर का पता चल जाए तो 30 से 40 फीसदी मरीजों को बचाया जा सकता है, लेकिन तीसरे और चौथे स्टेज में पहुंचने के बाद इलाज की तकनीक काफी कठिन हो जाती और मरीज पूरी तरह से कमजोर हो जाता है। इसी वजह से कम मरीज बच पाते हैं।
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पूर्वांचल में महिलाओं में सबसे अधिक कैंसर बच्चेदानी, ब्रेस्ट के आ रहे हैं। इसी तरह पुरुषों में मुंह और फेफड़े के कैंसर बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को सलाह दी जा रही है कि मेमोग्रॉफी कराएं। इसी तरह पुरुष हर दो साल पर कैंसर की जांच कराते रहें।
स्क्रीनिंग में पता चला गांठ जांच में निकला कैंसर
डॉ. आलोक तिवारी ने बताया कि एक महिला मरीज की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान ब्रेस्ट में बहुत छोटी गांठ मिली। गांठ की जब जांच की गई तो पता चला कि आठ मिलीमीटर का कैंसर है। इस पर महिला की रेडिएशन थेरेपी से इलाज किया गया और वह पूरी तरह से सफल रहा। इसके बाद उसकी जांच की गई तो कोशिकाओं में कैंसर नहीं मिला। अब मरीज का फालोअप किया जा रहा है।