गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में बनने वाले प्लास्टिक पार्क के प्रस्तावित स्थल का केंद्रीय टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया और फिर अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने डीपीआर में आंशिक बदलाव का सुझाव दिया।
शनिवार को डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल्स एंड पेट्रो केमिकल्स के निदेशक आरके सोनी और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के चीफ मैनेजर यूपी सिंह ने प्लास्टिक पार्क के प्रस्तावित स्थल भगवानपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बनाए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में आंशिक बदलाव करते हुए हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी करने का निर्देश दिया। इसके बाद टीम ने गीडा के उद्यमियों और उद्यमियों के साथ बैठक की। इस दौरान उद्यमियों ने प्लास्टिक पार्क में उद्यमियों को दी जाने वाली सुविधाएं और छूट के संबंध में जानकारी मांगी। बैठक में गीडा महाप्रबंधक रत्नेश सिंह, उपायुक्त उद्योग रवि कुमार शर्मा के अलावा बिजली विभाग के अधिकारी एवं उद्यमी मौजूद रहे।
गीडा के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि प्लास्टिक पार्क में उद्यमियों को भी जो भी सुविधाएं मिलती हैं, वह सभी सुविधाएं और छूट गोरखपुर के उद्यमियों को भी मिलेंगी। इसके अलावा भी गीडा प्रशासन उद्यमियों को अन्य सुविधाएं देने का प्रयास करेगा। वहीं केंद्रीय टीम ने प्लास्टिक पार्क की डीपीआर में आंशिक बदलाव का सुझाव दिया है। सुझाव के अनुुसार डीपीआर में हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी संबंधी परिवर्तन करते हुए 10 दिन के अंदर भेज दिया जाएगा। एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में नए डीपीआर को रखा जाएगा।
करीब 81 करोड़ की लागत से बन रहा है प्लास्टिक पार्क
गीडा के भगवानपुर में करीब 81 करोड़ रुपये की लागत से प्लास्टिक पार्क बनाया जाएगा। 71 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाले इस पार्क के लिए 40 करोड़ केंद्र को देना है, बाकी का खर्च गीडा और उत्तर प्रदेश सरकार को करना है। पार्क की स्थापना से 5000 से अधिक लोगों को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है। प्लास्टिक पार्क में 90 फैक्ट्रियां लगेंगी। साथ ही प्रशासनिक भवन, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, यूटिलिटी शॉप्स और भंडारण इकाईयां भी संचालित होंगी। प्लास्टिक पार्क में पांच एकड़ में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान (सीआईपीईटी) की भी स्थापना होगी। सेंटर में उद्यमियों के लिये प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के निर्माण के लिये आधुनिक प्लांट एवं मशीनरी लगायी जाएंगी। टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन तथा रिसर्च की सुविधा भी दी जाएगी।