सड़क : 869 लाख
नाले एवं पुलिया: 258 लाख
जलापूर्ति, ओवरहेड टैंक, ट्यूबवेल एवं पंप: 571 लाख
वेस्ट मैनेजमेंट ट्रीटमेंट: 600 लाख
पावर सप्लाई एवं सब स्टेशन : 1652 लाख
बाउंड्री वाल-230 लाख
एडमिन बिल्डिंग: 597 लाख
प्लांट एवं उपकरण: 1000 लाख
पार्क में लगेंगी 92 फैक्ट्रियां
प्लास्टिक पार्क में 92 औद्योगिक भूखंड होंगे यानी 92 फैक्ट्रियां लगेंगी। साथ ही प्रशासनिक भवन, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, यूटिलिटी शॉप्स और भंडारण इकाइयां भी संचालित होंगी। इन 90 भूखंडों का साइज 600 वर्गमीटर से 17,000 वर्गमीटर तक होगा। प्रशासनिक भवन 900 वर्गमीटर का होगा। भूतल में बैंक, कैंटीन एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा। प्रशासनिक भवन के प्रथम तल पर श्रमिकों के लिए डारमेट्री एवं प्रबंधकीय आवास बनेगा।
प्लास्टिक पार्क में तकनीकी संस्थान खुलेंगे और शोध भी होंगे। पांच एकड़ में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान (सीआईपीईटी) की स्थापना होगी। सेंटर में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के निर्माण के लिए आधुनिक प्लांट एवं मशीनरी लगाई जाएंगी। टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन व रिसर्च की सुविधा भी दी जाएगी। प्रस्तावित प्लास्टिक पार्क में लगभग चार एकड़ भूमि आरक्षित की गई है, जिस पर कच्चे माल की आपूर्ति व भंडारण किया जाएगा।
देश का सातवां प्लास्टिक पार्क
गीडा में देश का सातवां प्लास्टिक पार्क स्थापित होगा। अब तक मध्य प्रदेश के तामोंट गांव, मध्य प्रदेश के ग्वालियर के बिलौआ गांव, ओडिशा में जगतसिंहपुर के पास प्रदीप गांव, असम के गेल्लापुखुरी, झारखंड के देवीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के वायल्लूर में प्लास्टिक पार्क स्थापित किए जा चुके हैं।
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि प्लास्टिक पार्क को केंद्र सरकार के रसायन एवं खाद मंत्रालय ने अंतिम स्वीकृति दे दी है। तीन महीने के अंदर मूलभूत संरचना के निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी होगा। छह महीने में प्लॉट आवंटन संबंधी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। तब तक यहां विकास संबंधी सारे कार्य भी हो जाएंगे। प्लास्टिक पार्क के बनने के लिए दो साल का समय निर्धारित है। निर्धारित समय में सभी कार्य हो जाएंगे।