गोरखपुर। शाहपुर थाना क्षेत्र के घोषीपुरवा में मां-बेटी की हत्या के सात दिन बाद आखिरकार पुलिस को एक अहम सुराग मिला है। जांच के दौरान मोहल्ले के सीसीटीवी फुटेज में दो बाइक सवार संदिग्ध नजर आए हैं, जिनके आने-जाने का समय और उनका लोकेशन, हत्या के वक्त से बिल्कुल मेल खा रहा है। पुलिस ने जांच का फोकस अब इन्हीं संदिग्धों पर केंद्रित कर दिया है और उनकी तलाश तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, घटना वाली रात विमला दूध लेने दुकान गई थीं। कुछ देर बाद वह घर लौट आईं और उसके बाद दोबारा बाहर नहीं निकलीं। इसी दौरान सीसीटीवी में दो बाइक सवार संदिग्ध मोहल्ले में दाखिल होते दिखे। कुछ समय बाद दोनों को वापस जाते भी देखा गया। जांच में यह भी सामने आया है कि घटना के दौरान कोई बाहरी व्यक्ति मोहल्ले में नहीं आया था, जिससे इन संदिग्ध बाइक सवारों पर पुलिस का शक और गहरा गया है।
23 नवंबर की रात शांति देवी और उनकी बेटी विमला की घर के भीतर हथौड़े से हत्या कर दी गई थी। घटनास्थल से पुलिस को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जो सीधे हत्यारों तक पहुंचाए। हथौड़ा भी कपड़े में लिपटा मिला था, जिस कारण फिंगरप्रिंट नहीं मिल सके। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम को कमरे से कोई विशेष साक्ष्य नहीं मिला। शुरुआती जांच की धीमी रफ्तार और सबूतों के न मिलने पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे। इसी वजह से एसएसपी राजकरन नय्यर ने सोमवार को जेल रोड चौकी प्रभारी उमेश शर्मा को लाइनहाजिर कर दिया। चौकी की जिम्मेदारी अब उपनिरीक्षक विकास कुमार को सौंपी गई है।