महाविद्यालयों के शिक्षकों को शोध कार्य कराने की अनुमति देने के मामले पर कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि उन्हें डीआरसी एवं आरडीसी के अनुमोदन के बाद एडवाइजर और को-एडवाइजर बनाया जा सकेगा। पीएचडी की कमेटी तीन सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। जिसके अनुसार विश्वविद्यालय के आर्डिनेंस में अपेक्षित परिवर्तन कर महाविद्यालय के शिक्षकों की मांग पूरी करने की दिशा में प्रयास होगा।
दूसरे और तीसरे शनिवार को होगी शिक्षकों से मुलाकात
बैठक में कुलपति ने कहा कि हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार की दोपहर तीन से पांच बजे तक विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के शिक्षकों से मुलाकात करेंगे। जबकि पहले और तीसरे शनिवार को प्राचार्य या शिक्षक विश्वविद्यालय के अधिकारियों से मिल सकेंगे।
मुलाकात के लिए आने वाले शिक्षक इसकी सूचना कुलपति कार्यालय को स्वयं अथवा मेल के माध्यम से कर दें, ताकि उन्हें कोई असुविधा न हो। कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि परीक्षा समिति में अनुदानित महाविद्यालयों के दो शिक्षकों को सदस्य के रूप में नामित किया जाएगा। ऐसे संवाद आगे भी प्राचार्यों से जारी रहेंगे। कहा कि विश्वविद्यालय और अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के पाल्यों को प्रवेश में नियमानुसार छूट दी जाएगी।