छह करोड़ रुपये कीमत के धान की धोखाधड़ी मामले में अधिकारियों पर भी प्रश्न चिह्न लग रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि मिलर को धान देने के बाद अधिकारियों को उसके संपर्क में रहना चाहिए था। छह करोड़ रुपये कीमत का धान इतना कम नहीं होता कि कोई रातों-रात पार कर दे।
राइस मिल से इतनी बड़ी मात्रा में धान इधर से उधर कर दिया गया और अधिकारियों को भनक न लगना संदिग्ध प्रतीत होता है। धान कुटाई के जानकार कहते हैं कि मिलर जैसे-जैसे धान कूटता जाता है चावल और भूसी पीसीएफ या पीसीयू को देता जाता है। सारा चावल इकट्ठा ही कूट कर नहीं दिया जाता। यदि अधिकारी धान आवंटन के बाद से ही मिलर के काम की निगरानी करते तो शायद यह घपला न होता।
पहले भी हुई है धोखाधड़ी
पीसीएफ सूत्रों के मुताबिक दो साल पहले भी इसी तरह की धोखाधड़ी हुई थी। तब पूर्वी सहजनवां तहसील क्षेत्र के गीडा सेक्टर 13 स्थित स्वास्तिक मिलर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया था। जांच में स्वास्तिक मिलर दोषी पाया गया था और उसके खिलाफ आरसी जारी की गई थी। आरसी तो जारी हुई लेकिन विभाग आज तक वसूली नहीं कर सका। जानकारों को आशंका है कि कहीं जेडास राइस मिल का मामला भी स्वास्तिक मिल की तरह ही कागजों में दम न तोड़ दे।