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गर्भस्थ शिशु की जांच में लापरवाही का मामला, नवजात के माता-पिता ने आईएमए पर उठाए सवाल

Tue, 05 Jan 2021 03:56 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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नवजात बच्चे के साथ दंपती। - फोटो : अमर उजाला।
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अगर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की मांग पर दोबारा मेडिकल बोर्ड का गठन होता है तो कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा। ऐसा हुआ तो रिपोर्ट भी बदली जा सकती है। यह कहना है कि दिव्यांग शिशु के पिता अभिषेक पांडेय व मां अनुराधा पांडेय का। दोनों सोमवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

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पिपरौली के देईपार निवासी अभिषेक पांडेय और उनकी पत्नी अनुराधा पांडेय ने कहा कि गर्भस्थ शिशु की गलत रिपोर्ट देने के मामले में चार डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज है। अल्ट्रासाउंड सेंटर सील कर दिए गए हैं।

ऐसे में अल्ट्रासाउंड सेंटरों का सील खोलने और नए सिरे से जांच के लिए दोबारा मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग सरासर गलत है। सीएमओ की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को गलत बताना बोर्ड के डॉक्टरों की योग्यता पर सवाल उठाने जैसा है।

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ये है मामला

अभिषेक ने अपनी गर्भवती पत्नी का चार अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच कराई थी। इसमें कलर डाप्लर लेवल-टू के अल्ट्रासाउंड भी शमिल थे। सभी लोगों ने बच्चे की रिपोर्ट सामान्य बताई थी। जबबच्चा पैदा हुआ तो उसके एक हाथ नहीं है और सिर भी असामान्य है। इस मामले में मेडिकल बोर्ड ने चारों डॉक्टरों को दोषी माना है। इस मामले में कैंट थाने में लापरवाही और धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है।  

आईएमए अध्यक्ष डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि आईएमए ने मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग सीएम और डीएम से की है। बोर्ड गठन का फैसला प्रशासन करेगा। रही बात युवक के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की, तो यह पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद है। इस मामले को आईएमए के पदाधिकारियों और सदस्यों के समक्ष रखा जाएगा।
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