गोरखपुर। लखनऊ के हैदरगंज इलाके में हाल ही में एक स्कूटी सवार युवक की चीनी मांझा की चपेट में आने से मौत के बाद प्रशासन ने गोरखपुर में भी चीन के मांझा के प्रति सतर्कता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों के बाद शहर की पुलिस ने चीनी मांझा के खिलाफ विशेष अभियान शुरू कर दिया है। शुक्रवार को दुकानों पर छापा मारकर दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी गई।
कोतवाली थाना क्षेत्र में पुलिस ने शुक्रवार को पतंग और मांझा की दुकानों पर सघन अभियान चलाया। अभियान के तहत शहर की पुरानी पतंग और मांझा की दुकान हाजी पतंग वाले पर भी छापा मारा गया। हालांकि, पुलिस को किसी भी दुकान पर चीनी मांझा बरामद नहीं हुआ। दुकानदारों को चेतावनी दी गई कि वे चीनी मांझा न बेचें। सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया कि सबको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चीनी मांझा से होने वाली किसी भी घटना को केवल दुर्घटना नहीं माना जाएगा। दुकानदारों को साफ तौर पर बताया गया है कि वे अपने यहां कोई भी चीनी मांझा न रखें। यदि किसी प्रकार की परेशानी आती है तो पुलिस प्रशासन से संपर्क करें।
दुकानदारों ने पुलिस को जानकारी दी कि उनका सामान मुख्य रूप से बरेली से आता है। पुलिस ने इस दौरान दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बरेली का मांझा होता है सुरक्षित
चीनी मांझा और बरेली से आने वाला मांझा दोनों पतंग उड़ाने में उपयोग होते हैं लेकिन इनमें सुरक्षा और सामग्री के लिहाज से बड़ा अंतर है। चीनी मांझा आमतौर पर पॉलीएस्टर या नायलॉन धागे पर पत्थर या ग्लास कतरनों से बनाया जाता है। यह बेहद तेज और धारदार होता है, जिससे बाइक सवार या पैदल चल रहे व्यक्ति को गंभीर चोट लग सकती है। इसकी वजह से देशभर में हादसे होने की घटनाएं सामने आती रही हैं और इसे कई राज्यों में प्रतिबंधित किया गया है। बरेली मांझा पारंपरिक रूप से रेशमी या कॉटन धागे से बनता है और इसमें कतरनों का उपयोग नहीं होता। यह अधिक सुरक्षित माना जाता है और स्थानीय रूप से पतंगबाजों में लोकप्रिय है।