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Gorakhpur News: सर्किल रेट से चार गुना मुआवजे पर अटका बाईपास, जाम से जूझ रहे शहरवासी

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- सिरजम से मुंडेरा बुजुर्ग तक 22 किमी बननी है बाईपास
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- निर्माण पर 1700 करोड़ रुपये होंगे खर्च, शिलान्यास के बाद सीमांकन कराकर विभाग ने लगा दिया पिलर
- पिलर लगते ही किसानों ने शुरू कर दिया आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहरवासियों को जाम से निजात दिलाने के लिए देवरिया बाईपास के निर्माण कार्य की प्रक्रिया तेज हुई थी, लेकिन इस पर ब्रेक लग गया। मुआवजे की कौन कहे, अभी सीमांकन का कार्य पूरा करके पिलर गाड़ने का कार्य चल रहा था, कि विरोध शुरू हो गया। हो भी क्यों न बाईपास के निर्माण में कई रिहायशी मकान व बस्तियां आ रही हैं, जो भविष्य में उजड़ने के कगार पर हैं।
मकान की कौन कहे विभाग भूमि अधिग्रहण का भी उचित मुआवजा नहीं दे रहा है, जिसे लेकर किसान खासे परेशान हैं, और आंदोलन करने पर उतारू हैं। भूमि बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण सर्किल रेट से चार गुना अधिक कीमत देने की मांग को ले किसान जन जागरण यात्रा भी निकाल रहे हैं।
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देवरिया शहर में जाम की समस्या नासूर बन गई है। इससे निजात दिलाने के लिए वर्षों से बाईपास बनाने की मांग की जा रही थी। इस पर केंद्र सरकार ने बाईपास को हरी झंडी दे दी और शिलान्यास भी कर दिया गया। देवरिया-गोरखपुर मार्ग पर सिरजम से मुंडेरा बुजुर्ग तक बनने वाले बाईपास निर्माण पर कुल 1700 करोड़ रुपये खर्च होनेे हैं।
सीमांकन कराने के बाद पिलर लगाने का कार्य शुरू हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने मुआवजा के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया। इसी बीच किसान व ग्रामीण मनमाफिक मुआवजा न मिलने से आक्रोशित हो गए। इसके चलते बाईपास निर्माण कार्य की रफ्तार धीमी हो गई।
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जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 37 गांवों के किसान विरोध में उतरे
- सर्किल रेट से चार गुना की जगह कम कीमत देने का प्रशासन पर लगाया आरोप
देवरिया। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार ने बाईपास मार्ग के निर्माण की आधारशिला रखी। इसके बाद किसान व ग्रामीण भूमि बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन का रुख अख्तियार कर लिए। आंदोलित किसानों का कहना है कि वर्ष 2018 के सर्किल रेट के चार गुना कीमत देने की बात प्रशासन कर रहा है। जबकि सड़क निर्माण को लेकर प्रस्ताव वर्ष 2023 में तैयार किया गया, तो मौजूदा समय के अनुसार सर्किल रेट तय किया जाना चाहिए। तय रेट के अनुसार चार गुना कीमत दिया जाना चाहिए। इससे कम पर हम किसान किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। हालांकि इनके मन में जमीन छिन जाने का भय भी है। हम जमीन बचाने के लिए आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।





बाईपास निर्माण की जद में 1000 किसानों की जमीन

एनएच 727 ए सिरजम से मुंडेरा बाईपास की जद में एक आंकलन के मुताबिक 1000 किसानों की भूमि जा रही है। खास बात यह है कि यह निर्णय लेने के पूर्व किसानों से कोई सहमति नहीं ली गई। किसानों की मंजूरी के बिना ही उनके खेतों में पत्थर लगाकर सड़क का सीमांकन कर दिया गया है। इसको लेकर किसानों में अधिक नाराजगी है। ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां आबादी के करीब से यह सड़क निकल रही है। इसमें देवरिया मीर, धनौती खास, धनौती खुर्द, मुड़ेरा खुर्द, इटवा, गोड़री, संझवा, भीमपुर, सुकरौली, पकड़ी बुजुर्ग, पकड़ी खुर्द, रामपुर, गोबराई खास, भगौतीपुर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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37 गांवों के करीब 150 किसान हो जाएंगे भूमिहीन, 50 मकान भी हो जाएगा ध्वस्त

सिरजम से मुंडेरा तक बन रहे बाईपास की जद में आ रहे किसानों की आय का एक मात्र साधन खेती ही है। इसमें भी धान व गेहूं जैसी फसलों की पारंपरिक खेती पर ही निर्भरता है। सघन आबादी क्षेत्र व छोटे जोतदारों की संख्या सर्वाधिक है। लिहाजा एक- दो कट्ठे से लेकर एक बीघा तक ही अधिकांश किसानों की भूमि है। ऐसे में खेतिहर मजदूर की संख्या यहां सर्वाधिक हैं। जिनके लिए सड़क के नाम पर सरकारी फरमान के मुताबिक भूमिहीनों की श्रेणी में शामिल होना किसी अभिशाप से कम नहीं हैं। सड़क में 37 गांवों के 1000 किसानों की भूमि ली जा रही है, जिनमें से तकरीबन ऐसे 150 किसानों संख्या है। जिनकी जमीन चले जाने पर वे भूमिहीन हो जायेंगे। 50 रिहायशी मकानों को भी ध्वस्त किया जाएगा।





इन गांवों से गुजरेगी बाईपास सड़क

बाईपास सड़क सिरजम खास से इटावा, गुडरी, बैतालपुर, बलुआ, संझवा, बरारी तप्पा चतुरा, बांसपार बुजुर्ग, जैतपुरा, मुडेरा, परसा, बरवा, गौरा, भीमपुर, बरारी तप्पा गोबराई, भगौतीपुर, पोखरभींडा तप्पा गोबराई, मुंडेरा तप्पा गोबराई, धनौती खुर्द, गोबराई खास, कुसम्हा बेलवा, रामपुर खुर्द, पगरा उर्फ परसिया, पकड़ी खुर्द, पकड़ी बुजुर्ग, घटेलावेती, घटेलागाजी, चकरवा धुस, देवरिया मीर, सरैया तप्पा कचुआर, दुबौली तप्पा कचुआर, अहिलवार खुर्द, धनौती, अहिलवार बुजुर्ग, सुकरौली, सोनूघाट के आगे मुंडेरा बुजुर्ग जाकर सलेमपुर से जुड़ जाएगा। पर किसानों का कहना है कि उचित मुआवजा नहीं मिलने पर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है।


कोट
बाइपास की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। किसानों को मुआवजा देने के लिए बजट के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। जल्द ही बजट मिल जाएगा और किसानों में इसका वितरण भी शुरू कर दिया जाएगा।
-गौरव श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी प्रशासन

स्पीकअप
किसान विकास के विरुद्ध नहीं हैं। किसानों को उनकी जमीन का वाजिब मूल्य मिलना चाहिए। किसानों की मांग है कि उन्हें बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, जो सरकार नहीं दे रही है।
-अजीत कुमार त्रिपाठी, संयोजक, भूमि बचाओ संंघर्ष समिति

घनी आबादी क्षेत्र व छोटे जोतदारों की संख्या सर्वाधिक है। लिहाजा एक- दो कट्ठे से लेकर एक बीघा तक ही अधिकांश किसानों की भूमि है। कई किसान भूमिहीन हो जा रहे हैं। हमलोगों को बाजार मूल्य से कम नहीं चाहिए।
-राजनाथ यादव, किसान

बाइपास निर्माण से जहां करीबन 150 किसान ऐसे है जो भूमिहीन हो जायेंगे। 50 रिहायशी मकानों को भी ध्वस्त किया जाएगा। मकान ध्वस्त करने के बाद उन्हें पुनर्वासित किया जाए।
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-रामनाथ पांडेय, किसान

बाईपास निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं है। बाईपास में जिन किसानों की जमीन जा रही है उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, जो रेट तय है उससे चार गुना अधिक दिया जाए। साथ ही मकान बनवाकर भी दिया जाए।
-हीरालाल यादव, किसान
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