समय: दोपहर 12:30 बजे। प्लेटफॉर्म दो पर काठगोदाम से हाबड़ा जाने के लिए बाघ एक्सप्रेस जैसे ही पहुंची, ट्रेन में चढ़ने के लिए लोग सामान लेकर दौड़ पड़े। जनरल कोच में चढ़ने के लिए यात्री आपस में जूझने लगे। कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। धक्कामुक्की के बाद किसी तरह जो यात्री कोच में चढ़े उन्हें जगह ही नहीं मिली। गेट के पास भीड़ इतनी हो गई कि कुछ यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ पाए।
अवध एक्सप्रेस के कोच के पावदान पर लटके रहे
रेलवे स्टेशन पर लगातार एनाउंस हो रहा था कि कोच के पावदान में पर बैठकर या लटक कर यात्रा न करें। ट्रेन की चपेट में आ सकते हैं। प्लेटफॉर्म दो पर मुंबई से बिहार जा रही अवध एक्सप्रेस पहुंची। कोच में जब जगह नहीं मिली तो पावदान पर ही यात्री लटक गए। पास ही खड़े आरपीएफ व जीआरपी ने उन्हें उतारा भी नहीं। कुछ ही देर बाद ट्रेन चल पड़ी।
भीड़ बढ़ते ही शुरू हुआ पानी का खेल, सिस्टम फेल
ट्रेनों में भीड़ बढ़ते ही पानी का खेल शुरू हो गया है। वेंडर पानी को अवैध बोतलें भी बेचने लगे हैं। बाघ एक्सप्रेस में एक ठेले से एक हजार से ज्यादा पानी की बोतलें वेंडर चढ़वा रहे थे, जिसे रेलवे ने बेचने पर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन, पानी की इन बोतलों को बेचने पर ज्यादा मुनाफा मिलता है। पानी का यह खेल खुलेआम चल रहा है और पूरा सिस्टम फेल है। प्रतिबंध का दावा सिर्फ सरकारी है, हकीकत में ट्रेन में पानी का यह खेल जारी है।