गोरखपुर जिले के विधानसभा चुनाव के नतीजों से सबसे बड़ा झटका बसपा को लगा है। ब्राह्मण मतों के भरोसे चुनावी जीतने का दंभ भरने वाले पार्टी के रणनीतिकार अपने परंपरागत मतों को भी सहेज नहीं पाए। जिसका परिणाम यह हुआ कि जिले की नौ सीटों पर कहीं भी बसपा मुख्य लड़ाई में नहीं रही। कई जगहों पर चौथे स्थान पर खिसक गई।
वर्ष 2017 में जब भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला था और जिले से सभी राजनीतिक दलों का सूपड़ा साफ हो गया था। उस समय चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से बसपा को जीत हासिल हुई थी।
वर्ष 2012 में चिल्लूपार से राजेश त्रिपाठी, चौरीचौरा से जयप्रकाश निषाद, बांसगांव से डॉ. विजय कुमार और सहजनवां से राजेंद्र उर्फ बृजेश सिंह निर्वाचित हुए थे। जबकि वर्ष 2007 में भी चार सीटें बसपा के खाते में आई थीं।
चिल्लूपार से राजेश त्रिपाठी, सहजनवां से जीएम सिंह, चौरीचौरा से जयप्रकाश निषाद और पिपराइच से जमुना निषाद चुनाव जीते थे। लेकिन, इस बार पार्टी अपनी साख भी नहीं बचा पाई। किसी भी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी दूसरे नंबर पर भी नहीं रही।