- नेपाल से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद तेज हुई जांच, पति मनीष सिन्हा ने ससुरालियों से बनाई दूरी
- डॉक्टर और दो सहकर्मियों पर लगा था हत्या का आरोप, चार माह में सभी को मिल गई थी जमानत
- जमानत के बाद हाईकोर्ट पहुंचा डॉक्टर, पुलिस जांच और निचली अदालत की कार्रवाई को दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नेपाल में वर्ष 2018 में हुई शाहपुर की राजेश्वरी उर्फ राखी श्रीवास्तव की हत्या के मामले ने पिछले सात साल में कई मोड़ देखे हैं, लेकिन उसके भाई अब भी न्याय के लिए भटक रहे हैं। बीएसएफ जवान से शादी के बाद नेपाल गई राखी की संदिग्ध हालात में लाश मिली थी। नेपाल से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गई है। वहीं, पति मनीष सिन्हा ने इस मामले और ससुरालियों से दूरी बना ली है।
राखी अपने पति मनीष सिन्हा के साथ वर्ष-2018 में नेपाल भ्रमण पर गई थीं। इसी दौरान नेपाल के कास्की जिले के सारंगकोट क्षेत्र में संदिग्ध हालात में उसका शव मिला था। राखी के मायके वालों ने उसके अपहरण और हत्या का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस ने डॉ. डीपी सिंह और उनके दो कर्मचारियों संतोष कुमार और देश दीपक को आरोपी बनाकर जेल भिजवाया था। पुलिस का दावा था कि हत्यारोपियों ने हत्या को हादसे का रूप देने के लिए राखी को पहाड़ से धक्का दे दिया था। चार माह तक जेल में रहने के बाद आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। जमानत के बाद डॉक्टर ने हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई की चुनौती दी और निचली अदालत की कार्रवाई और पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रोसीडिंग पर स्टे दे दिया, जिससे जांच की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी। हालांकि, पति मनीष सिन्हा अभी तक किसी भी स्तर पर पुलिस या परिवार से संपर्क में नहीं आए हैं, जिससे मामले में कई सवाल बने हुए हैं। राखी के बड़े भाई व मुकदमे के वादी अमर प्रकाश श्रीवास्तव के अनुसार, नेपाल से मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच को नई दिशा दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि राखी की हत्या नेपाल में पहाड़ियों से फेंक कर नहीं बल्कि सिर और पेट पर भारी वस्तु से वार कर की गई थी। इसके बाद उसके शव को नेपाल के सारंगकोट क्षेत्र के जंगल की झाड़ियों में पत्तों से छिपा दिया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कार्यवाही पर दे दिया था स्टे
एसटीएफ ने दिसंबर 2018 में राखी हत्याकांड में डॉ. डीपी सिंह और उसके दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर वारदात के पर्दाफाश का दावा किया था। शाहपुर पुलिस ने मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी, लेकिन कोर्ट में पोस्टमार्टम न दाखिल किए जाने के चलते आरोपियों को महज चार माह में ही जमानत मिल गई थी। जमानत के बाद आरोपी डॉक्टर ने हाईकोर्ट में केस को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर स्टे दे दिया जिससे जांच धीमी पड़ गई। हालांकि, पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद फिर मामले की जांच शुरू की है।
भाई की लड़ाई और न्याय की तलाश
राखी के भाई अमर प्रकाश ने बताया कि वह सात साल से न्याय की तलाश में भटक रहे हैं। उनका कहना है कि वह हर स्तर पर न्याय के लिए लड़ेंगे, चाहे वह पुलिस जांच हो या अदालत की कार्यवाही। यह लड़ाई सिर्फ राखी के हक के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में अन्य पीड़ितों के लिए भी मिसाल बनेगी।
कोट
जांच अधिकारी मान रहे हैं कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, हाईकोर्ट के स्टे आदेश और परिवार से मिली जानकारी के आधार पर मामला धीरे-धीरे सुलझ सकता है। मामले की गहन जांच कराई जा रही है और सभी आवश्यक कानूनी और फॉरेंसिक प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा।
- रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ