चुनावी माहौल के बावजूद अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा इन दिनों राजनीति के बजाय समाज की समस्याओं पर चर्चा कर रही है। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि अपनी पुरानी पहचान को बनाए रखने के लिए पढ़ाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर विचार जरूरी है।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा से जुड़े कृष्ण कुमार दूबे, रामलक्षन पांडेय, अश्विनी पांडेय, गिरजाशंकर पांडेय आदि लोग सवाल उठाते हैं कि आज हर जाति का अपना एक संगठन और अगुवा है, लेकिन ब्राह्मण समाज का कोई सर्व मान्य नेता क्यों नहीं है? वजह केवल इतनी भर है कि हमारा जातीय संगठन बहुत कमजोर है। इसलिए अब संगठन को मजबूत करना बहुत जरूरी है, वरना आने वाले कुछ वर्षों में ही ब्राह्मण समाज और अधिक उपेक्षित हो जाएगा।
जिलाध्यक्ष अच्युतानंद पांडेय कहते हैं कि संगठन को गतिशील बनाने के साथ-साथ समाज को भी सजग किया जा रहा है। नई पीढ़ी को भी कर्मकांड से जोड़े रखने के लिए, बच्चों को संस्कृत की शिक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है। युवाओं को कर्मकांड व ज्योतिष की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे एक तो रोजगार का संकट कम होगा, दूसरे सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार भी होता रहेगा।