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BRD: 1973 बैच के डॉक्टरों ने सुनाईं उस दौर की कहानियां, खुद ढोकर लाइब्रेरी में पहुंचाई थीं किताबें और उपकरण

Thu, 03 Nov 2022 02:24 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

शहर के जाने-माने डॉक्टर रामजी बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 1973 बैच के छात्र रहे हैं। बताते हैं कि 1973 में मेडिकल कॉलेज रोड पर एक भी दुकान नहीं थी। छह माह तक हम लोग भी राजकीय पॉलीटेक्निक में क्लास करने जाते थे। इसके बाद प्राचार्य कार्यालय के बगल में एक कमरा बना और उसमें कक्षाएं चलने लगीं। इन सबके बीच जब चाय पीने का मन होता था, तो हम लोगों को झुगियां बाजार जाना पड़ता था।
 
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BRD - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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1972 में शुरू हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज का इतिहास बेहद रोचक रहा है। एक कमरे के हॉस्टल से शुरू हुए कॉलेज में आज 18 से अधिक विभाग चल रहे हैं। इनमें यूजी से लेकर पीजी तक की पढ़ाई हो रही है। 1972 बैच के बाद 1973 बैच जब शुरू हुआ तो इस बैच के भी विद्यार्थियों ने छह माह तक राजकीय पॉलीटेक्निक असुरन में कक्षाएं कीं। लेकिन, छह माह बाद कैंपस में ही (मौजूदा वक्त में एसबीआई को आवंटित कमरा) कक्षाएं चलने लगीं।

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इन सबके बीच लाइब्रेरी का निर्माण हुआ। लाइब्रेरी में किताबें और उपकरण रखने के लिए कर्मियों की कमी थी। इस पर 1973 बैच के छात्रों ने ही किताबें और उपकरण ढोकर लाइब्रेरी तक पहुंचाए। स्वर्ण जयंती के मौके पर कॉलेज के इतिहास के बारे में 1973 बैच के छात्रों से वार्ता की गई तो उन्होंने अपनी सुनहरी यादें साझा कीं।

 

छह माह तक घबरा गए थे परिजन
शहर के जाने-माने डॉक्टर रामजी बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 1973 बैच के छात्र रहे हैं। बताते हैं कि 1973 में मेडिकल कॉलेज रोड पर एक भी दुकान नहीं थी। छह माह तक हम लोग भी राजकीय पॉलीटेक्निक में क्लास करने जाते थे। इसके बाद प्राचार्य कार्यालय के बगल में एक कमरा बना और उसमें कक्षाएं चलने लगीं। इन सबके बीच जब चाय पीने का मन होता था, तो हम लोगों को झुगियां बाजार जाना पड़ता था।

क्योंकि, कॉलेज के आसपास कोई भी दुकान नहीं था। इसकी वजह से परिजन काफी डरते थे। छह महीने तक परिजन काफी घबराए हुए थे और पढ़ाई छोड़ने तक की बात कर चुके थे। लेकिन, प्रधानाचार्य डॉ. प्यारे लाल ने परिजनों को समझाया, तब जाकर परिजन माने। खुशी होती है उसी कॉलेज में पढ़ा और बाद में एनाटॉमी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुआ।

 
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पहला हॉस्टल था, जहां एक साथ रहते थे छात्र और छात्राएं

शहर के जानेमाने बाल रोग विशेषज्ञ व बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा 1973 बैच के छात्र रहे हैं। डॉ. कुशवाहा बताते हैं कि उस दौर में कॉलेज के पास कोई बिल्डिंग नहीं थी। एक बिल्डिंग थी, जिसमें कक्षाएं नहीं चलती थीं। उस दौर में प्रदेश का इकलौता ऐसा कॉलेज था, जहां छात्र, छात्राएं और शिक्षक एक ही बिल्डिंग में रहते थे। एक ही साथ छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का मेस चलता था।

 उस दौर में भी सीनियर रैगिंग करते थे, लेकिन अनुशासन के दायरे में रहकर। बरसात के मौसम में ज्यादा दिक्कतें थीं। हर तरफ पानी भर जाता था, लेकिन इसके बाद भी पढ़ाई अच्छे से होती थी। शहर में रहने के बाद भी हॉस्टल ही अपना घर था। खुशी इस बात की होती है कि जिस कॉलेज में पढ़ाई की, उसी कॉलेज में बच्चों को पढ़ाया और प्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी भी संभाली।

डीएम और एसएसपी ने लिया तैयारियों का जायजा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। तैयारियों को लेकर बुधवार को कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार, डीएम कृष्णा करूणेश, एसएसपी गौरव ग्रोवर ने कॉलेज कैंपस का निरीक्षण करते हुए स्वर्ण जयंती द्वार को देखा। प्राचार्य ने बताया कि स्वर्ण जयंती द्वार बनकर तैयार हो गया है। डीएम ने द्वार बनाने वालों को निर्देश दिया कि चार नवंबर तक बांस-बल्ली हट जाएं, जिससे की द्वार से आवागमन में कोई परेशानी न हो। इस बीच उन्होंने कैंपस में बन रहे मंच का भी निरीक्षण किया।
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