फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोरखपुर: तब खूनचुसवा गिरोह था...अब खून माफिया, बंधक बनाकर सेटिंग से बेचते थे खून

Tue, 29 Aug 2023 12:52 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

मजदूरों का खून निकलवाने का धंधा वर्ष 2008 में भी पकड़ा गया था। तब 17 मजदूरों को बंधक बनाकर हफ्ते में तीन बार उनका खून निकाल जाता था और सेटिंग से बेचा जाता था। समय मास्टरमाइंड बताया गया पश्चिम बंगाल का जयंत सरकार पर आज भी 25000 रुपये का इनाम है, जिसे पुलिस नहीं पकड़ सकी है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मजदूरों के खून को बेचकर रुपये कमाने का अवैध धंधा बीते 15 वर्ष पहले भी होता था। लेकिन, तब सिर्फ एक खूनचुसवा गिरोह ही सक्रिय था लेकिन अब खून माफिया सक्रिय हैं। इस धंधे में एजेंट से लेकर मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी भी शामिल हैं।
विज्ञापन


मजदूरों का खून निकलवाने का धंधा वर्ष 2008 में भी पकड़ा गया था। तब 17 मजदूरों को बंधक बनाकर हफ्ते में तीन बार उनका खून निकाल जाता था और सेटिंग से बेचा जाता था। समय मास्टरमाइंड बताया गया पश्चिम बंगाल का जयंत सरकार पर आज भी 25000 रुपये का इनाम है, जिसे पुलिस नहीं पकड़ सकी है।

इसे भी पढ़ें: बीआरडी स्टाफ की मिलीभगत से गैंग चला रहा था निगम कर्मी, गिरफ्तार; ऐसे करता था खेल
विज्ञापन


अब इस खेल में माफिया सक्रिय हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि नेटवर्क में मेडिकल कॉलेज के संविदा कर्मचारियों से लेकर ब्लड बैंक तक के कर्मचारी शामिल है। वहीं, मजदूर को रक्तदाता बताकर खून बेचा जा रहा है।
विज्ञापन


दोनों ही मामलों में एक बात समान है कि मजदूरों का ही टारगेट बनाया है। मजदूरों को गिरोह का सदस्य बनाकर आसानी से रक्तदाता बता दिया जाता है। इसके बाद जिसे खून दिया जाता है उससे मोटी रकम ऐंठ ली जाती है। हिस्सा सभी में बंट जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें