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Gorakhpur News: सुरक्षित प्रसव के लिए खून की कमी बन रही समस्या

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-बीआरडी में आने वाली 40 प्रतिशत प्रसूताओं में रहती है खून की कमी
-हर चौथी महिला को अतिरिक्त ब्लड की पड़ रही जरूरत

-आयरन की कमी गर्भवतियों को बना रही बीमार

संवाद न्यूज एजेंसी

गोरखपुर। खून की कमी गर्भवती महिलाओं को बीमार बना रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में आने वाली 40 प्रतिशत ऐसी प्रसूताएं होती हैं, जो एनीमिया से ग्रसित पाई जाती हैं। ऐसी महिलाओं को प्रसव के दौरान अतिरिक्त खून की जरूरत पड़ती है। इलाज के दौरान रोजाना हर चौथी प्रसूता में खून देकर ऑपरेशन किया जाता है।
एनीमिया की स्थिति में प्रसव के दौरान खतरा बढ़ जाता है, जिससे मां और नवजात दोनों की जान की जोखिम में पड़ जाती है। सुरक्षित प्रसव के लिए एनीमिया से ग्रसित महिला को एक से दो यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन खून की कमी होने पर यह जरूरत और बढ़ जाती है। 55 बेड की मेटरनिटी वार्ड में इलाज करा रही ज्यादातर महिलाओं को खून की कमी को अतिरिक्त ब्लड देकर ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया है।
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गंभीर मामलों में तत्काल रक्त की व्यवस्था करना लोगों के लिए समस्या भी बन जाती है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रूमा सरकार ने बताया कि महिलाओं में एनीमिया को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है। कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं या जानबूझकर आयरन युक्त आहार और दवाओं से परहेज करती हैं, जिससे गर्भावस्था के दौरान स्थिति गंभीर हो जाती है।
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उन्होंने बताया कि अस्पताल में आने वाली लगभग 40 प्रतिशत प्रसुताओं में खून की कमी पाई जाती है, जिसे पूरा करने के लिए रक्त चढ़ाना अनिवार्य हो जाता है। इससे इलाज करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पडता है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, आयरन युक्त भोजन और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का सेवन एनीमिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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