सपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने छानबीन के नाम परेशान किया है। पहले टीडीएम चौराहे पर रोककर प्रत्याशी के कागजात देखे, फिर अलहदादपुर व बेतियाहाता चौराहे पर छानबीन की गई। शास्त्री चौराहा पर करीब एक घंटे तक रोका गया। जब एडीएम सिटी आए तो पैदल जाने को मिला है।
तीस मिनट पहले ही वापस हो गए सपाई
नामांकन प्रक्रिया खत्म होने से तीस मिनट पहले ही सपा के दूसरे प्रत्याशी जितेंद्र यादव व सपा जिलाध्यक्ष वापस जाने लगे। इसपर पुलिस ने रोका और कहा कि नामांकन करने के बाद ही जाने को मिलेगा। इससे आपाधापी मच गई। बताया गया कि पुलिस ने प्रत्याशी को पकड़ा था लेकिन एक पूर्व विधायक ने हाथ खींचकर छुड़ा लिया। इसके बाद सपा नेताओं ने शास्त्री चौक पर जाकर धरना दिया।
जिलाध्यक्ष भाजपा युधिष्ठिर सिंह सैंथवार ने कहा कि मुख्य द्वार बंद करने के आरोप निराधार हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में पत्रकार, प्रशासनिक व पुलिस के अफसर मौजूद थे। सपा का अधिकृत प्रत्याशी नामांकन करने नहीं आया। इसकी वजह पार्टी को तलाशनी चाहिए। जब जितेंद्र यादव ने नामांकन पत्र ही नहीं खरीदा था तो नामांकन कराने का औचित्य ही नहीं बनता है। सिर्फ विवाद बढ़ाने के लिए सपा ने जितेंद्र के नामांकन की जिद की थी। इसका भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। शांति एवं निष्पक्ष तरीके से नामांकन प्रक्रिया पूरी कराई गई है। भाजपा प्रत्याशी साधना सिंह के साथ 55 से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य थे। इससे डरकर ही सपा प्रत्याशी ने नामांकन नहीं कराया। अब विवाद बढ़ाकर सहानुभूति लेने का प्रयास कर रहे हैं। जनता सब जानती है। सपा का इतिहास विवादों से भरा है।