सपा से पूजा ने किया नामांकन।
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नामाकंन पत्र दाखिल किए जाने को लेकर दोनों दलों के नेता और समर्थकों की पार्टी कार्यालय पर भारी भीड़ थी। भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद द्विवेदी, सांसद जगदंबिका पाल, विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक श्यामधनी, विधायक चौधरी अमर सिंह और भाजपा कार्यकर्ता साथ गए, लेकिन नियम का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन ने कलेक्ट्रेट गेट से ही सभी को वापस कर दिया। वहीं सपा समर्थित प्रत्याशी के साथ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, जिला पंचायत सदस्य अनिता द्विवेदी, सोनू यादव, विजय यादव को भी प्रशासन ने गेट पर ही रोक दिया। नियम की बात करते हुए दोनों दल के लोगों को वापस कर दिया गया।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को रोका
साड़ी तिराहे पर पहुंचने के बाद पुलिस ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और पूर्व विधायक विजय पासवान, सपा नेता चिनकू यादव को रोक दिया गया। लगभग 20 मिनट हुई बहस के बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को जाने दिया गया, जबकि अन्य नेताओं को रोका दिया गया। सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन पर ज्यादती करने का आरोप लगाया।
छावनी में तब्दील रहा कलेक्ट्रेट
नामांकन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया गया था। सनई चौराहे पर ही बैरिकेडिंग कर वाहनों को पकड़ी के रास्ते भेजा गया। उसके बाद साड़ी तिराहे पर कलेक्ट्रेट जाने वाले रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। यहां जानकारी लेने के बाद ही लोगों को प्रवेश दिया गया। वहीं कलेक्ट्रेट गेट और अंदर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। हर प्वांइट पर निरीक्षक और उप निरीक्षक तैनात थे।
एसपी रामअभिलाष त्रिपाठी और एएसपी सुरेशचंद रावत भ्रमण करके सुरक्षा का जायजा लेते रहे। वहीं सुरक्षा व्यवस्था में सीओ सदर राणा महेंद्र प्रताप सिंह, सीओ प्रदीप कुमार यादव, सीओ अरुनचंद, उमेशंचद पांडेय, अजय कुमार श्रीवास्तव के अलावा एसओ सदर केडी सिंह, शोहरतगढ़ आरबी सिंह, त्रिलोकपुर रणधीर मिश्र, ढेबरुआ डीसी चौधरी, मोहाना जयप्रकाश दुबे, मिश्रौलिया पंकज कुमार पांडेय, कपिलवस्तु महेश सिंह सहित अन्य थानाध्यक्ष मौजूद रहे।
सपाइयों की रोकी गाड़ी, भाजपा का अंदर पहुंचा काफिला
भाजपा की झंडा लगी 25 से अधिक गाड़ियों पार्टी कार्यालय से कलेक्ट्रेट गेट के पास तक खड़ी दिखीं। वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को अंदर तक जाने में 20 मिनट तक बहस करना पड़ा। इस दौरान पुलिस प्रशासन का सत्ता की ओर झुकाव नजर आया।