जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भाजपा बिना सिंबल (चुनाव चिह्न) ही लड़ेगी। सभी सीटों पर अधिकृत प्रत्याशी उतारे जाएंगे। प्रत्याशी के पक्ष में जीत का माहौल भी बनाया जाएगा लेकिन सिंबल नहीं दिया जाएगा। पार्टी ने सभी ग्राम पंचायतों व क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव से किनारा कर लिया है। इन चुनावों में जो प्रत्याशी जीतेंगे और भाजपा से जुड़कर काम करना चाहेंगे, पार्टी उनका स्वागत करेगी। सिर्फ मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ही पार्टी ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ेगी। इन क्षेत्रों में प्रत्याशियों को समर्थन दिया जाएगा।
पंचायत चुनाव के बहाने भाजपा मिशन 2022 की तैयारी में लगी है। पार्टी का सारा जोर अपना जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख बनाना है। इसमें कामयाबी मिली तो ज्यादातर जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य खुद ही भाजपा से जुड़ जाएंगे। नाराजगी से बचने के लिए ही पार्टी सभी ग्राम पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों का चुनाव नहीं लड़ रही है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि इन चुनावों में एक साथ 15-20 प्रत्याशी मैदान में उतरते हैं। अगर भाजपा ने प्रत्याशी उतारा या फिर समर्थन दिया तो नाराजगी बढ़ सकती है। इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा। लिहाजा, पार्टी कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है। वह ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव से दूरी बनाए रखने में ही भलाई समझ रही है।
गोरखपुर में जिला पंचायत के 73 वार्ड
इस विषय पर तारामंडल रोड स्थित होटल कृष्णा पैलेस में बैठक भी हुई। गोरखपुर क्षेत्र के पंचायत चुनाव प्रभारी प्रकाश पाल ने तो इतना तक कहा कि किसी ग्राम प्रधान का समर्थन भाजपा कार्यकर्ता, पदाधिकारी नहीं करेंगे। ग्राम प्रधानी के चुनाव में तटस्थ रहने में ही भलाई है। सिर्फ अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ा जाएगा। इसके लिए मंडल अध्यक्षों से नाम मांग लिए गए हैं। हां, इतना जरूर है कि ब्लॉक प्रमुख का चुनाव पार्टी लड़ेगी। जो क्षेत्र पंचायत सदस्य जीतकर आएंगे, उन्हीं के सहयोग से अपना ब्लॉक प्रमुख बनवाने का प्रयास करेगी।
गोरखपुर में जिला पंचायत के 73 वार्ड हैं। अभी परिसीमन चल रहा है। 24 जनवरी को शासन अलग-अलग वार्डों का आरक्षण तय कर सकता है, फिर स्थानीय स्तर पर आदेश जारी होगा। पंचायत चुनाव का एलान फरवरी में हो सकता है। परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या कुछ कम भी हो सकती है, क्योंकि उरुवां और घघसरा को नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया है। वहीं करीब 33 गांव नगर निगम की सीमा में आ गए हैं।