पनेशिया हॉस्पिटल के डायरेक्टर विजय पांडेय ने भी बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि सांसद कमलेश पासवान गलत तरीके से मुझे मुकदमे में फंसाना चाहते हैं। हम लोग हॉस्पिटल पर मालिकाना हक होने पर गए थे। सांसद के कुछ लोग बीच में आ गए और फिर जाति सूचक गलियां देते हुए वीडियो भी बना लिया। अब तहरीर देकर सांसद फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।
साथियों के साथ आए विजय ने कहा कि डॉ. प्रमोद व अन्य ने 65 प्रतिशत शेयर खरीद लिया है। सांसद यह भी मान रहे हैं कि इन दोनों लोगों का केस कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में सांसद को यह पता होना चाहिए कि प्राइवेट कंपनी में डायरेक्टर बनने और शेयर की खरीद बिक्री के लिए कंपनी एक्ट 2013 व कंपनी के बाइलाज में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होती है।
हॉस्पिटल हड़पने की हड़बड़ी में ना तो न्यायालय का सम्मान किया गया और ना ही कंपनी एक्ट का पालन हुआ। जिला प्रशासन ने सांसद के दबाव में ही कंपनी के संचालन के विवाद को फौजदारी बना दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से न्याय का पूरा भरोसा है। मुख्यमंत्री को दोबारा पूरे मामले से अवगत कराएंगे।
दो मरीज और हुए डिस्चार्ज, छह मरीज अभी भी भर्ती
दो पक्षों में विवाद के कारण सील हुए होप पनेशिया अस्पताल से बुधवार को दो और मरीज डिस्चार्ज कर दिए गए। मौजूदा समय में छह मरीज और अस्पताल में भर्ती है। इनमें पांच आईसीयू वार्ड में भर्ती है। जबकि एक का इमरजेंसी में इलाज चल रहा है। अस्पताल का ओपीडी व अकाउंट कार्यालय को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।
दो पक्षों में विवाद के कारण अस्पताल को जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में सोमवार की रात 12 बजे सील कर दिया था। सील होने के 48 घंटे के अंदर सभी मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की बात कही गई थी। अगले दिन मंगलवार को 22 मरीजों में से 14 को डिस्चार्ज कर दिया गया था।
आईसीएयू में भर्ती होने के कारण पांच मरीजों को कहीं और भर्ती नहीं किया गया। परिजन भी इन मरीजों को कहीं और ले जाने के मूड में नहीं हैं। परिजनों का कहना है कोरोना महामारी के बीच मरीजों को कहीं और ले जाना खतरे से खाली नहीं है। इसकी वजह से अस्पताल प्रशासन उनके इलाज की पूरी व्यवस्था कर रहा है।
मरीजों की पूरी देखभाल की जा रही है। डॉक्टर व स्टॉफ उनकी देखरेख व इलाज कर रहे हैं। उनसे कहीं और जाने के लिए कहा गया, लेकिन वे जाने को तैयार नहीं है। जैसे ही वे ठीक होंगे, उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।-डॉ. विजय पांडेय, आइसीयू इंचार्ज
मरीजों को कोई दिक्कत न हो, इसलिए अस्पताल को यह सुविधा दी गई है कि उनकी ठीक से देखभाल की जाए। वे ठीक हो जाएं तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाए। नई भर्ती पर रोक है।-डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ