इसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण करने में ही चार साल लग गए। वर्ष 2012 में एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही एक बार फिर इस पर ग्रहण लगा और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने खर्च के अनुरूप यात्रियों की संख्या नहीं आने का हवाला देते हुए निर्माण कार्य से हाथ पीछे खींच लिया।
इसके बाद प्रदेश सरकार ने पहल की और वर्ष 2016 में हवाई अड्डे को पुनः अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप ही पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाने लगा। 584.35 एकड़ जमीन पर बन रहे इस एयरपोर्ट का रनवे, फायर बिल्डिंग व बाउंड्रीवाल का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा नई एटीसी बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए भी 21 करोड़ रुपये अवमुक्त हो चुके हैं।
पिछले वर्ष गोरखपुर में मुख्यमंत्री की तरफ से नया एयरपोर्ट बनाने की घोषणा के साथ ही कुशीनगर एयरपोर्ट के भविष्य पर फिर सवाल उठने लगे। आरोप लग रहा था कि गोरखपुर में एयरपोर्ट बन जाने के बाद कुशीनगर एयरपोर्ट का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा।
इसके बाद सांसद विजय कुमार दुबे ने मुख्यमंत्री से मिलकर इसके लिए पहल की तो मुख्यमंत्री के प्रयास से निर्माण कार्य में तेजी आई। पिछले दिनों सड़क चौड़ीकरण के साथ ही निर्माणाधीन एयरपोर्ट परिसर में स्थित शिवमंदिर व स्कूल को भी हटाने का रास्ता साफ हो गया।
जल्दी शुरू होगी उड़ानः डीएम
डीएम भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि कुशीनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के मानक के अनुरूप ही विकसित किया जा रहा है। काफी काम हो चुका है। सरकार की मंशा है कि यहां से जल्दी से जल्दी उड़ान शुरू कराई जाए। इसके लिए भी तैयारी की जा रही है।