गोरखपुर। जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस 23 जून को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता बूथ स्तर पर मनाएंगे। हर बूथ पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन कर उनको याद किया जाएगा। उन्होंने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी मौत कश्मीर की जेल में हुई थी। वह कहते थे देश में एक विधान एक संविधान रहेगा।
यह बातें क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय ने कही। उन्होंने बताया कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान 23 जून 1953 को कश्मीर की जेल में हुआ था। इसलिए हर साल उनका बलिदान दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। आजादी के बाद भी कश्मीर में जाने की इजाजत नहीं थी, उसके लिए परमिट लेना पड़ता था। तबकी केंद्र और जम्मू कश्मीर की सरकार के बीच इस तरह का करार था। उसके विरोध में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आंदोलन किया और उनको कश्मीर की जेल में रखा गया जहां उनकी मौत हो गई। डॉ.मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, यू कहें तो उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता अखंडता के लिए समर्पित कर दिया।