- गोरक्षनगरी बनी यूपी में भाजपा का केंद्र बिंदु, सीएम योगी को प्रदेश और अब पंकज चौधरी को संगठन की कमान
- पंकज के बहाने पिछड़ों को साधने की कोशिश, पिछले चुनाव में भाजपा से छिटक गया था पिछड़ा वोट बैंक
राजन राय
गोरखपुर। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने 2024 लोकसभा चुनाव से सबक लेते हुए सूबे में अगड़ी और पिछड़ी जातियों का तालमेल बिठाकर सपा के पीडीए (पिछड़, दलित, अल्पसंख्यक) पर बड़ा पलटवार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सूबे और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को संगठन की कमान सौंपकर राजनीतिक दलों को सियासी संदेश भी दिया है। भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत गैर यादव बिरादरी को साधने की जुगत की है। तेजी से बदलते समीकरण के बीच गोरक्षनगरी अब प्रदेश में भाजपा की सियासत का केंद्र बिंदु बन गई है।
भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की कवायद के बीच पिछले कुछ दिनों से कई नाम सुर्खियों में थे, लेकिन शनिवार को सिर्फ पंकज चौधरी के नामांकन के साथ तस्वीर साफ हो गई। अब सिर्फ घोषणा की औपचारिकता बाकी रह गई है। पंकज कुर्मी बिरादरी से आते हैं, जो यूपी में एक बड़ा और महत्वपूर्ण वोट बैंक है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर व राजनीतिक विश्लेषक डॉ. महेंद्र सिंह कहते हैं, भाजपा ने ओबीसी नेता को प्रदेश संगठन की कमान देकर न सिर्फ टकराव को रोकने की कोशिश की है बल्कि दूसरे सहयोगी दलों को भी संदेश दिया है। डॉ. सिंह कहते हैं, पिछले कुछ वर्षों से सरकार और संगठन के बीच तालमेल बहुत अच्छा नहीं था। पंकज चौधरी इसमें सेतु का काम करेंगे।
डॉ. सिंह कहते हैं कि आंतरिक टकराहट तो दूर होगी ही कुर्मी बिरादरी को लेकर चलने वाले सहयोगी दलों को भी यह एक संदेश है कि उनके पास भी बड़ा चेहरा है। प्रदेश में कुर्मी बिरादरी का करीब 8 से 10 फीसदी वोट है। इसके अलावा गैर यादव बिरादरी वाले पिछड़े वोट बैंक को भी साधने की कोशिश है। पार्टी और आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व में इनकी अच्छी पकड़, विवादों से दूर रहने और सबके लिए सहज उपलब्ध नेता की छवि के चलते पंकज पर शीर्ष नेतृत्व ने भरोसा जताया है। पंकज को लो-प्रोफाइल लेकिन असरदार नेता माना जाता है। संसदीय अनुभव और संगठनात्मक समझ के चलते वे उन नेताओं में शुमार हैं, जिन पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार भरोसा करता आया है।
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग भाजपा से रूठ कर सपा की तरफ चला गया था। इसके चलते प्रदेश में भाजपा को सिर्फ 33 सीटें ही मिल सकीं थीं। इन सारे पहलुओं को देखते हुए अब भाजपा ने बड़ा दांव खेला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पकड़ अगड़े समाज में बेहतर है और वही भाजपा का चेहरा हैं। अब ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा नेतृत्व ने तमाम अटकलों को खारिज कर दिया है।
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बड़े भाई ने पहली बार लड़ाया था सभासद का चुनाव
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी का सियासी सफर 1989 में शुरू हुआ। उनके बड़े भाई प्रदीप चौधरी ने शेखपुर मुहल्ले से सभासद का चुनाव लड़ाया था। प्रदीप की पकड़ वार्ड में बहुत अच्छी थी और औद्योगिक घराने से होने के चलते लोगों में शाख भी अच्छी थी। पंकज चुनाव जीते और डिप्टी मेयर भी बने। इसके बाद 1991 में उन्हें महराजगंज लोकसभा क्षेत्र से भाजपा ने टिकट दे दिया और राम मंदिर लहर में चुनाव जीत गए। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। महराजगंज जिला पंचायत पर उनका हमेशा कब्जा रहा। मां और भाई जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इसके बाद जिसे उन्होंने सरपरस्ती दी उसके ही सिर अध्यक्ष का ताज सजा।
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वैष्णो देवी दर्शन करने गए थे, खाई में पलट गई थी कार
पंकज चौधरी के परिवार के करीबी सुशील अग्रहरि बताते हैं कि वे 1987 में परिवार के साथ वैष्णो देवी दर्शन करने गए थे। लौटते वक्त कार खाई में पलट गई। इस हादसे में पंकज चौधरी की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। लंबे समय बाद वे स्वस्थ हुए लेकिन आज भी झुककर ही चलते हैं। सुशील कहते हैं, आज भी जब घर आते हैं तो मुहल्ले वालों से जरूर मिलते हैं।